George Resigns: जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा मंजूर, 4 दशक का संगठनात्मक सफर खत्म

जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व खत्म

मोदी सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने इस्तीफा दिया, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूर किया
केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा राष्ट्रपति ने स्वीकार किया। राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद राजनीतिक हलकों में कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

नई दिल्ली: मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री रहे जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी विज्ञप्ति में इसकी पुष्टि की गई। जॉर्ज कुरियन मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत थे। उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

जॉर्ज कुरियन RS टिकट नहीं मिलने के बाद तय माना जा रहा था फैसला

हाल ही में भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी की थी, जिसमें जॉर्ज कुरियन का नाम शामिल नहीं था। इसके बाद से ही यह माना जा रहा था कि राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। 21 जून को उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो गया था और अब उन्होंने मंत्री पद से भी इस्तीफा दे दिया है।

ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व खत्म, कैबिनेट में बना नया समीकरण

जॉर्ज कुरियन मोदी सरकार में ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र मंत्री थे। उनके इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार में फिलहाल कोई ईसाई मंत्री नहीं बचा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति भाजपा के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि पार्टी दक्षिण भारत और अल्पसंख्यक समुदायों में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।

केरल से दिल्ली तक, जॉर्ज कुरियन की राजनीतिक यात्रा

65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन का जन्म 20 सितंबर 1960 को केरल में हुआ था। उन्होंने कोट्टायम जिले में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की और बाद में कानून की पढ़ाई की। राजनीति में सक्रिय होने के साथ-साथ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वकालत भी की। वर्ष 1980 के दशक में जब कुछ समाजवादी नेता जनता दल छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे, तब जॉर्ज कुरियन भी भाजपा के साथ जुड़े। एक ईसाई परिवार से आने के कारण उनके इस फैसले की काफी आलोचना हुई थी, लेकिन उन्होंने संगठन में अपनी सक्रियता जारी रखी।

चार दशक का संगठनात्मक सफर, बीजेपी में कैसे बने अहम चेहरा

जॉर्ज कुरियन पिछले चार दशकों से भाजपा संगठन को मजबूत करने में जुटे रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। केरल में भाजपा के विस्तार अभियान में भी उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। संगठन में लंबे अनुभव और सक्रिय योगदान के चलते उन्हें 9 जून 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीसरी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया था।

रवनीत सिंह बिट्टू के भविष्य पर भी बढ़ीं चर्चाएं

जॉर्ज कुरियन के अलावा केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को भी इस बार भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाया। इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी उन्हें पंजाब की राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है। ऐसे में दोनों नेताओं के भविष्य को लेकर अटकलें लगातार जारी हैं।

बीजेपी के अंदर बदलावों के संकेत क्यों माने जा रहे हैं?

हाल के दिनों में भाजपा संगठन में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। पार्टी ने पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा जैसे राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर भी संगठनात्मक पुनर्गठन की प्रक्रिया जारी है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार में कार्य कर चुके कई नेताओं को संगठन में नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

संगठन और सरकार दोनों में बदलाव की तैयारी?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा संगठन और केंद्र सरकार दोनों स्तरों पर बदलाव की तैयारी कर रही है। जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने अभी तक किसी संभावित फेरबदल या नई नियुक्तियों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

क्या मोदी मंत्रिमंडल में जल्द दिखेंगे नए चेहरे?

जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद मोदी कैबिनेट के विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आने वाले समय में अपनी टीम में कुछ बदलाव कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।

जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के राजनीतिक मायने क्या हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे भाजपा की व्यापक राजनीतिक रणनीति भी हो सकती है। राज्यसभा टिकट न मिलना, संगठन में जारी बदलाव और संभावित कैबिनेट विस्तार को एक-दूसरे से जोड़कर देखा जा रहा है।

बीजेपी नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी सबकी निगाहें

फिलहाल भाजपा नेतृत्व की ओर से जॉर्ज कुरियन के भविष्य को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन उनके लंबे संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें किसी महत्वपूर्ण भूमिका में जिम्मेदारी दे सकती है। अब सभी की निगाहें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और भाजपा संगठन की दिशा तय कर सकते हैं। (Amar Bharti)

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