Britain Next PM? स्टार्मर के इस्तीफे के बाद रेस में 5 बड़े नाम, भारत के लिए कौन बेहतर?

ब्रिटेन का अगला PM कौन बनेगा? एंडी बर्नहैम: सबसे मजबूत दावेदार

स्टार्मर के इस्तीफे के बाद ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री पद के दावेदार
स्टार्मर के इस्तीफे के बाद लेबर पार्टी में नेतृत्व की नई लड़ाई शुरू हो गई है।

नई दिल्ली/अमर भारती। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। भावुक संबोधन में उन्होंने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र किया और 2024 में लेबर पार्टी को सत्ता में वापस लाने के अभियान को याद किया। स्टार्मर के इस्तीफे के साथ ही लेबर पार्टी में नए नेता और संभावित प्रधानमंत्री की तलाश तेज हो गई है।

पार्टी के भीतर स्टार्मर के बाद कई बड़े नामों की चर्चा है, जिनमें एंडी बर्नहैम, एंजेला रेनर, शबाना महमूद, अल-कार्न्स और वेस स्ट्रीटिंग प्रमुख माने जा रहे हैं। इनमें से कुछ नेताओं का भारत के प्रति सकारात्मक रुख रहा है, जबकि कुछ के पुराने बयान विवादों का कारण बने हैं।

एंडी बर्नहैम: सबसे मजबूत दावेदार

एंडी बर्नहैम को इस समय लेबर पार्टी की नेतृत्व दौड़ का सबसे मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है। हाल ही में मेकर्सफील्ड उपचुनाव जीतकर संसद में लौटे बर्नहैम ग्रेटर मैनचेस्टर के लोकप्रिय मेयर रह चुके हैं। कई रिपोर्टों में उन्हें स्टार्मर का संभावित उत्तराधिकारी बताया गया है।

भारत पर रुख

बर्नहैम भारत-ब्रिटेन संबंधों के प्रबल समर्थक माने जाते हैं। उन्होंने व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ाने के लिए कई मंचों पर भारत के साथ मजबूत साझेदारी की वकालत की है। मैनचेस्टर इंडिया पार्टनरशिप के जरिए भी उन्होंने भारत के साथ करीबी संबंधों पर जोर दिया। ऐसे में स्टार्मर के बाद अगर वह प्रधानमंत्री बनते हैं तो इसका फायदा भारत-ब्रिटेन संबंधों पर भी देखने को मिलेगा।

एंजेला रेनर: वापसी की तैयारी

वहीं स्टार्मर के बाद एक और नाम को लेकर भी चर्चा ज़ोरों पर है चूंकि लेबर पार्टी की पूर्व उपनेता एंजेला रेनर लंबे समय से पार्टी की प्रमुख चेहरों में शामिल रही हैं हालांकि टैक्स विवाद के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा था, लेकिन बाद में आरोपों से राहत मिलने के बाद उनकी राजनीतिक वापसी का रास्ता खुल गया। ऐसे में अगर उनका नाम भी अन्य नामों की तरह चर्चा में है।

भारत पर रुख

रेनर ने भारत और लेबर पार्टी के संबंध सुधारने में सक्रिय भूमिका निभाई। 2023 में भारत दौरे के दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की कोशिश की थी। स्टार्मर के बाद उनके नाम पर भी बात बन सकती है।

शबाना महमूद: अनुभव और विवाद दोनों

पाकिस्तानी मूल के परिवार से आने वाली शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली मुस्लिम महिला सांसदों में शामिल रही हैं। वर्तमान में वे गृह मंत्री के पद पर हैं और पार्टी के भीतर प्रभावशाली नेताओं में गिनी जाती हैं। स्टार्मर के इस्तीफे के बाद उनका नाम भी सियासी गलियारों में गूंज रहा है।

भारत पर रुख

भारत को लेकर उनका रिकॉर्ड मिश्रित रहा है। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद उन्होंने भारत सरकार की आलोचना की थी और कश्मीर मुद्दे पर कई बार सार्वजनिक बयान दिए थे। यही वजह है कि भारत में उनके नाम को लेकर अक्सर बहस होती रही है। स्टार्मर के बाद अगर वह प्रधानमंत्री बनती हैं तो उनके ऊपर निर्भर करता है कि वह आगे रिश्ते कैसे रखना चाहेंगी।

अल-कार्न्स: सेना से राजनीति तक

पूर्व रॉयल मरीन अधिकारी अल-कार्न्स को नेतृत्व दौड़ का “डार्क हॉर्स” माना जा रहा है। अफगानिस्तान में सैन्य सेवाओं के लिए सम्मानित हो चुके कार्न्स ने हाल ही में रक्षा निवेश को लेकर मतभेद के कारण मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।

भारत पर रुख

कार्न्स की रणनीतिक सोच हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर केंद्रित रही है। वे भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण साझेदार मानते रहे हैं। रक्षा तकनीक और सैन्य सहयोग को बढ़ाने की दिशा में उनके विचार भारत के लिए सकारात्मक माने जाते हैं।

वेस स्ट्रीटिंग: युवा और प्रभावशाली चेहरा

वेस स्ट्रीटिंग लेबर पार्टी के सबसे प्रभावी वक्ताओं में गिने जाते हैं। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है और पार्टी के भीतर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

भारत पर रुख

स्ट्रीटिंग कई मौकों पर भारत-ब्रिटेन संबंधों की खुलकर सराहना कर चुके हैं। उन्होंने भारतीय समुदाय के योगदान की प्रशंसा की है और भारत के स्वास्थ्य सेवा मॉडल को भी सराहा है।

भारत के लिए कौन सबसे बेहतर विकल्प?

अगर भारत के नजरिए से देखा जाए तो एंडी बर्नहैम, एंजेला रेनर, अल-कार्न्स और वेस स्ट्रीटिंग को अपेक्षाकृत अधिक सकारात्मक विकल्प माना जा सकता है। वहीं शबाना महमूद का रिकॉर्ड कश्मीर और भारत से जुड़े कुछ मुद्दों पर अधिक आलोचनात्मक रहा है।

हालांकि ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, इसका फैसला लेबर पार्टी की आंतरिक प्रक्रिया से होगा। लेकिन इतना तय है कि स्टार्मर के इस्तीफे के बाद शुरू हुई यह नेतृत्व दौड़ न सिर्फ ब्रिटेन बल्कि भारत-ब्रिटेन संबंधों के भविष्य पर भी असर डाल सकती है। (AMAR BHARTI)

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