ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग, SIR पर ममता-उद्धव का हमला

उद्धव ठाकरे बोले- CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाकर जेल भेजा जाए

ज्ञानेश कुमार पर SIR विवाद के बीच ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे की मांग
SIR विवाद के बीच ज्ञानेश कुमार पर विपक्षी नेताओं की कार्रवाई की मांग

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर जारी राजनीतिक विवाद बुधवार को और तेज हो गया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और चुनाव दोबारा कराने की मांग उठाई, जबकि उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के पिछले चुनाव रद्द कर बैलेट पेपर से दोबारा चुनाव कराने की मांग की।

ज्ञानेश कुमार पर ममता बनर्जी का बड़ा हमला

SIR को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने SIR को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए इसे अपने राजनीतिक अंदाज में “स्पेशल इंसेंटिव फॉर रूलिंग पार्टी” कहा।

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीजेपी और ज्ञानेश कुमार एक जॉइंट वेंचर कंपनी की तरह काम कर रहे हैं और उनके मुताबिक बंगाल के चुनाव में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग के पास नैतिक ताकत है तो बंगाल का चुनाव वापस कराया जाना चाहिए।

ममता ने इसे गंभीर मामला बताते हुए ज्ञानेश कुमार की तत्काल गिरफ्तारी और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। ये सभी आरोप ममता बनर्जी के राजनीतिक बयान के तौर पर सामने आए हैं।

उद्धव ठाकरे ने भी की ज्ञानेश कुमार को जेल भेजने की मांग

शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और जेल भेजने की मांग की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठाकरे ने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया।

उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए पिछले चुनावों को रद्द करने और इन तीनों राज्यों में बैलेट पेपर के जरिए दोबारा चुनाव कराने की मांग की।

उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज पर भी सवाल उठाए और कहा कि ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाकर जेल भेजा जाना चाहिए। यह मांग भी उद्धव ठाकरे की ओर से लगाए गए आरोपों और राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है।

10 महीने में 14 बार आपत्ति की रिपोर्ट

विवाद की शुरुआत उस मीडिया रिपोर्ट के बाद हुई, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों तथा आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ फैसले ऐसे थे जिन्हें दोनों अधिकारियों ने अपने संज्ञान या जानकारी के बिना लिए जाने की बात कही।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने, SIR प्रक्रिया में लिए गए फैसलों तथा चुनावी डेटा के प्रबंधन से जुड़े मुद्दों से था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने चुनावी रोल के IT सिस्टम और डेटा तक पहुंच को लेकर सवाल उठाए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में से चार एक ही दिन दर्ज की गई थीं। दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से उठाई गई चिंताओं की जानकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी दी गई थी।

चुनाव आयोग ने रिपोर्ट के बाद क्या कहा?

मीडिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद चुनाव आयोग के सूत्रों ने इससे अलग पक्ष रखा। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग के सूत्रों ने कहा कि SIR सहित चुनाव आयोग के सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी। आयोग ने कथित मतभेदों को संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा बताया और कहा कि उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

यानी एक तरफ मीडिया रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियों का उल्लेख है, वहीं चुनाव आयोग के सूत्रों ने फैसलों को सर्वसम्मत बताया है। इसी अंतर ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

SIR विवाद पर विपक्ष की मांगें तेज

SIR को लेकर विपक्षी दल पहले से ही चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाते रहे हैं। ताजा रिपोर्ट के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग और तेज हुई है।

ममता बनर्जी ने SIR वाले राज्यों में चुनाव दोबारा कराने की मांग उठाई है, जबकि उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में पिछले चुनावों को रद्द कर बैलेट पेपर से नए चुनाव कराने की मांग की है।

इस पूरे विवाद का केंद्र चुनावी मतदाता सूची के पुनरीक्षण, SIR के तहत लिए गए फैसलों और चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया से जुड़े सवाल हैं। फिलहाल राजनीतिक दलों के आरोपों और चुनाव आयोग की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण के बीच यह मुद्दा सार्वजनिक बहस का विषय बना हुआ है।

विवाद से सियासी पारा हाई

ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी रिपोर्ट के बाद बढ़ा है। ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे ने CEC के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और अलग-अलग राज्यों में दोबारा चुनाव कराने की मांग की है, जबकि चुनाव आयोग के सूत्रों ने SIR समेत अपने फैसलों को सर्वसम्मत बताया है। (Amar Bharti)

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