पत्नी का पति मनीष गुप्ता (Manish Gupta)पर चाकू से हमला, 10 दिन तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद ली अंतिम सांस

नई दिल्ली/अमर भारती। कानपुर के फीलखाना थाना क्षेत्र में प्रेम विवाह का एक दर्दनाक अंत सामने आया है। पत्नी द्वारा किए गए कथित चाकू हमले में गंभीर रूप से घायल हुए व्यापारी मनीष गुप्ता ने 11 दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद दम तोड़ दिया। मामले में पुलिस ने आरोपी पत्नी निहारिका को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि अब जांच का केंद्र उसके मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और डिजिटल साक्ष्यों पर आ गया है।
10 दिन तक लड़ने के बाद मनीष गुप्ता की मौत
फीलखाना क्षेत्र स्थित बालाजी धाम अपार्टमेंट निवासी कपूर व्यापारी मनीष गुप्ता (Manish Gupta) पर 5 जून को उनकी पत्नी निहारिका ने कथित रूप से चाकू से हमला किया था। गंभीर रूप से घायल मनीष को पहले स्थानीय अस्पताल और बाद में हैलट अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान 16 जून को उनकी मौत हो गई।
मृतक के पिता रामकिशोर ने घटना के बाद बहू निहारिका के खिलाफ मनीष गुप्ता (Manish Gupta) पर जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अब मनीष की मौत के बाद पुलिस ने मामले में हत्या की धारा भी जोड़ दी है।
प्रेम विवाह के बाद रिश्तों में बढ़ता गया तनाव
परिजनों के मुताबिक मनीष गुप्ता (Manish Gupta) और निहारिका के बीच करीब एक दशक पहले प्रेम संबंध शुरू हुए थे। दोनों ने वर्ष 2017 में प्रेम विवाह किया था। शुरुआती वर्षों में दांपत्य जीवन सामान्य रहा, लेकिन बीते तीन वर्षों से रिश्तों में तनाव बढ़ने लगा था।
परिवार का आरोप है कि निहारिका की जम्मू निवासी एक युवक से नजदीकियां बढ़ गई थीं। इसी वजह से पति मनीष गुप्ता (Manish Gupta) और पत्नी निहारिका के बीच लगातार विवाद होने लगा था। परिजनों का कहना है कि मनीष इस संबंध का विरोध करता था, जिससे दोनों के बीच अक्सर झगड़े होते थे।
कथित पुरुष मित्र से बातचीत को लेकर होता था विवाद
मृतक के परिजनों का दावा है कि निहारिका अपने कथित पुरुष मित्र से घंटों फोन पर बातचीत करती थी। इस बात को लेकर मनीष गुप्ता (Manish Gupta) कई बार आपत्ति जताता था। परिवार का आरोप है कि जब भी विवाद बढ़ता था, निहारिका दहेज उत्पीड़न की शिकायत की धमकी देती थी और कई बार पुलिस भी बुला लेती थी।
हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
बेटे के सामने हुआ खूनी संघर्ष
बताया जा रहा है कि 5 जून की दोपहर निहारिका अपने कमरे में फोन पर बात कर रही थी। इसी दौरान पति मनीष गुप्ता (Manish Gupta) की अपनी पत्नी निहारिका से किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झगड़े में बदल गई।
घटना के समय कमरे में दंपति का छह वर्षीय बेटा विष्णु भी मौजूद था। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर निहारिका ने रसोई से चाकू उठाया और मनीष के पेट तथा कमर पर कई वार कर दिए। हमले में मनीष गुप्ता गंभीर रूप से घायल हो गए।
खून से लथपथ हालत में बेटे का हाथ पकड़कर पहुंचे थाने
घटना के बाद मनीष गुप्ता (Manish Gupta) ने असाधारण साहस का परिचय दिया। परिजनों के अनुसार वह एक हाथ से अपना खून रोकते हुए और दूसरे हाथ से बेटे विष्णु का हाथ पकड़कर करीब 500 मीटर दूर स्थित फीलखाना थाने पहुंचे।
थाने पहुंचकर उन्होंने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। इस दौरान मासूम विष्णु ने भी पुलिस के सामने अपने तरीके से घटना का जिक्र किया। पुलिस ने तत्काल घायल मनीष गुप्ता को अस्पताल भिजवाया, जहां से उन्हें बेहतर इलाज के लिए हैलट अस्पताल रेफर किया गया था।
मोबाइल फोन और CDR जांच के केंद्र में
मनीष गुप्ता की मौत के बाद जांच और तेज हो गई है। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने अभी तक आरोपी महिला का मोबाइल फोन कब्जे में नहीं लिया है, जबकि उसमें कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मौजूद हो सकते हैं।
पिता रामकिशोर का कहना है कि निहारिका के मोबाइल की चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल डेटा से मामले के कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस कथित पुरुष मित्र तक पहुंचने में अपेक्षित तेजी नहीं दिखा रही है। अगर पुलिस इस मामले में जरा भी ढीली पड़ती है तो उनके बेटे मनीष गुप्ता (Manish Gupta) के कातिलों के सबूत से वह हाथ धो बैठेगी.
पुलिस क्या कह रही है?
फीलखाना थाना प्रभारी अभय सिंह के अनुसार मामले की जांच विभिन्न पहलुओं से की जा रही है। उन्होंने बताया कि आरोपी महिला की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाली जा रही है और डिजिटल साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया जारी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही मोबाइल फोन को कब्जे में लेकर उसकी फोरेंसिक जांच कराई जाएगी, जिससे मनीष गुप्ता (Manish Gupta) मर्डर केस से जुड़े तथ्यों की पुष्टि हो सके।
मासूम बेटे विष्णु के भविष्य पर मंडरा रहा संकट
मनीष गुप्ता (Manish Gupta) अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। उनके निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अब वृद्ध माता-पिता अपने छह वर्षीय पोते विष्णु के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
मृतक के पिता रामकिशोर का कहना है कि यदि पारिवारिक विवाद का समाधान कानूनी तरीके से होता और अलगाव की स्थिति बनती, तो कम से कम बच्चे को दोनों माता-पिता का साथ मिल सकता था। लेकिन इस घटना ने न सुिर्फ उनके बेटे मनीष गुप्ता (Manish Gupta) को उनसे छीन लिया बल्कि पूरे परिवार को ही बिखेर कर रख दिया है। अब केवल दोस्त के साथ पत्नी निहारिका के संबंधों के सबूत सामने आने बाकी है.
निष्कर्ष
कानपुर का यह मामला प्रेम विवाह, पारिवारिक विवाद और डिजिटल साक्ष्यों की अहमियत को एक बार फिर सामने लाता है। अब पुलिस जांच का पूरा फोकस मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर है। आने वाले दिनों में फोरेंसिक जांच और डिजिटल साक्ष्यों से इस हाई-प्रोफाइल मनीष गुप्ता (Manish Gupta) हत्याकांड के कई महत्वपूर्ण पहलुओं से पर्दा उठ सकता है।
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