Nepal Flood: लिरुंग ग्लेशियर का हिस्सा टूटा, करीब 1 किलोमीटर नीचे गिरा मलबा

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नेपाल में आई अचानक भीषण बाढ़ (Nepal Flood) की वजह को लेकर शुरुआती दौर में भूकंप और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF की आशंका जताई गई थी। लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों और भूकंपीय आंकड़ों के विश्लेषण से सामने आया कि नेपाल बाढ़ के पीछे नेपाल-तिब्बत सीमा के पास लिरुंग ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिरना अहम वजह था। इस घटना के बाद बर्फ, पत्थर और मलबे की तेज लहर ने नदी के बहाव को बदल दिया और निचले इलाकों में भारी तबाही मचाई।
नेपाल बाढ़ की शुरुआत में क्यों हुआ भूकंप का शक?
नेपाल बाढ़ आने के दौरान जमीन में कंपन रिकॉर्ड किया गया था। इसी वजह से शुरुआत में आशंका जताई गई कि शायद इलाके में भूकंप आया है। बाद में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS ने इस रिकॉर्ड की दोबारा जांच की।
जांच में भूकंप की पुष्टि नहीं हुई। सामने आया कि दर्ज किया गया कंपन ग्लेशियर के टूटने और उसके साथ नीचे आए मलबे के कारण पैदा हुआ था। यानी जिस कंपन को शुरुआत में भूकंप से जोड़कर देखा जा रहा था, वह वास्तव में ग्लेशियर टूटने की घटना से जुड़ा था। (Nepal Flood)
इसी के साथ नेपाल बाढ़ की वजह को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हुई और जांच का फोकस ग्लेशियर टूटने की घटना पर चला गया।
लिरुंग ग्लेशियर का हिस्सा टूटा, नीचे आया भारी मलबा
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास लिरुंग ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर करीब एक किलोमीटर नीचे घाटी में गिरा। इसके साथ बर्फ, पत्थर और भारी मात्रा में मलबा भी नीचे आया।
सैटेलाइट तस्वीरों में ग्लेशियर से घाटी तक एक नया निशान दिखाई दिया। यही वह इलाका था, जहां से कंपन का रिकॉर्ड भी मिला था। इससे ग्लेशियर के टूटने और उसके बाद पैदा हुए घटनाक्रम के बीच संबंध सामने आया।
बताया गया कि ग्लेशियर के भीतर पहुंचा पिघला हुआ पानी बर्फ और जमीन के बीच पकड़ को कमजोर कर सकता है। ऐसी स्थिति में ग्लेशियर का कोई हिस्सा अचानक खिसककर नीचे गिर सकता है। हालांकि, लिरुंग ग्लेशियर के टूटने की सटीक वजह को लेकर वैज्ञानिक अभी बर्फ के पिघलने, तापमान बढ़ने और ग्लेशियर के भीतर पानी पहुंचने जैसे पहलुओं की जांच कर रहे हैं। (Nepal Flood)
नेपाल बाढ़ में देखते ही देखते बदल गया नदी का रूप
ग्लेशियर से नीचे आया मलबा नदी तक पहुंचा। इसके बाद पानी के बहाव पर असर पड़ा और नदी तेजी से फैलने लगी। नेपाल बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ ही समय में नदी का दायरा कई गुना बढ़ गया।

स्याफ्रुबेसी में नदी किनारे की बस्तियां भारी मलबे की चपेट में आ गईं। बेट्रावती बाजार में नदी का दायरा करीब 90 मीटर से बढ़कर 490 मीटर तक पहुंच गया।
बिदुर में भी स्थिति गंभीर रही। यहां नदी करीब 100 मीटर से फैलकर 549 मीटर चौड़ी हो गई। इस अचानक बदलाव ने नदी किनारे बसे इलाकों के सामने बड़ा खतरा पैदा कर दिया। (Nepal Flood)
GLOF की आशंका से अलग निकली नेपाल बाढ़ की कहानी
नेपाल बाढ़ के बाद ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF की आशंका भी सामने आई थी। इसके अलावा चीन की तरफ हुई किसी घटना को भी बाढ़ से जोड़कर देखा गया था। लेकिन उपलब्ध सैटेलाइट तस्वीरों और भूकंपीय आंकड़ों के विश्लेषण में लिरुंग ग्लेशियर के हिस्से के टूटने की घटना सामने आई।
इसका मतलब यह नहीं है कि हिमालय में मौजूद दूसरे संभावित खतरे खत्म हो गए हैं। बल्कि इस घटना ने यह दिखाया है कि ग्लेशियर, बर्फ, पानी और मलबे से जुड़ी घटनाएं कितनी तेजी से निचले इलाकों को प्रभावित कर सकती हैं।
आगे भी बाढ़ का खतरा क्यों?
नेपाल बाढ़ (Nepal Flood) के बाद सबसे बड़ी चिंता अब ऊपरी इलाकों में जमा मलबे को लेकर है। नेपाल-चीन सीमा के ऊपरी हिस्सों में अभी भी मलबा जमा होने की बात कही गई है। अगर यह मलबा पानी के रास्ते को रोकता है और बाद में अचानक यह रुकावट टूटती है, तो नीचे की ओर तेज पानी आने का खतरा हो सकता है।

इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट यानी ICIMOD में क्लाइमेट एंड एनवायरनमेंटल रिस्क्स लीड छियांगगॉन्ग झांग ने भी ऐसी संभावित स्थिति को लेकर चेतावनी दी है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?
नेपाल में हुई इस घटना का महत्व सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं है। हिमालय का भौगोलिक और पर्यावरणीय तंत्र नेपाल से लेकर भारत के पहाड़ी इलाकों तक जुड़ा हुआ है। ऐसे में ग्लेशियरों में होने वाले बदलाव और उनसे जुड़ी अचानक आने वाली बाढ़ निचले इलाकों के लिए भी चिंता का विषय बन सकती है।
हालांकि, लिरुंग ग्लेशियर के टूटने को सीधे जलवायु परिवर्तन का परिणाम मानना अभी जल्दबाजी होगी। वैज्ञानिक इसके पीछे बर्फ के पिघलने, तापमान में बदलाव और ग्लेशियर के भीतर पानी पहुंचने जैसे संभावित कारणों की जांच कर रहे हैं। (Nepal Flood)
नेपाल बाढ़ की यह घटना एक अहम संकेत जरूर देती है कि ग्लेशियरों की निगरानी, संभावित जल अवरोधों पर नजर और समय रहते चेतावनी की व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है। (Amar Bharti)
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