संसद का विशेष सत्र: मानसून सत्र का अभी तक नहीं हुआ सत्रावसान

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावनाओं ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के संकेतों के बाद माना जा रहा है कि सरकार महिला आरक्षण कानून को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस बीच विपक्ष ने परिसीमन से जुड़े सरकार के प्रस्ताव पर पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
संसद का विशेष सत्र बुलाने के संकेत क्यों अहम हैं?
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद को दोबारा बुलाए जाने की संभावना के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं से महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने की प्रतिबद्धता जता चुके हैं और सरकार उसी दिशा में काम कर रही है।
हालांकि, रिजिजू ने 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाने के उद्देश्य से तत्काल संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने पर स्पष्ट टिप्पणी नहीं की।
उन्होंने यह जरूर कहा कि अतीत में बिना सत्रावसान के भी संसद को दोबारा बुलाया गया है। यही वजह है कि संसद के अगले सत्र को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं।
मानसून सत्र का अभी तक नहीं हुआ सत्रावसान
13 अगस्त को मानसून सत्र अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन अभी तक इसका विधिवत सत्रावसान नहीं हुआ है। ऐसे में सरकार के पास संसद को दोबारा बुलाने की संभावना बनी हुई है।
रिजिजू ने कहा, “प्रधानमंत्री पहले ही देश की महिलाओं से स्पष्ट प्रतिबद्धता जता चुके हैं कि महिला आरक्षण और संसद द्वारा महिलाओं को दिया गया वचन लागू किया जाएगा। हम उसी आधार पर काम कर रहे हैं।”
इसी टिप्पणी को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मानसून सत्र के सत्रावसान में हो रही देरी से जोड़कर देखा है। खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन को लेकर सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
परिसीमन को लेकर विपक्ष की क्या मांग है?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि परिसीमन का मुद्दा देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि संसद में विधेयक पेश किए जाने से पहले राजनीतिक दलों को सरकार के प्रस्ताव का अध्ययन करने और उस पर चर्चा करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।

खरगे ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी का रुख स्पष्ट है। कांग्रेस चाहती है कि लोकसभा की मौजूदा संख्या 543 सांसद और राज्यों की हिस्सेदारी को 25 साल तक फ्रीज रखा जाए।
इसके साथ ही कांग्रेस की मांग है कि संसद की मौजूदा क्षमता के आधार पर ही 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू किया जाए।
खरगे ने प्रधानमंत्री को यह भी याद दिलाया कि उन्होंने 16 जुलाई को पत्र लिखकर परिसीमन से जुड़े सरकार के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। संसद का विशेष सत्र पर इस बार सभी नज़र टिकी हुई हैं।
सितंबर में संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की अटकलें
संसद का विशेष सत्र सितंबर के पहले सप्ताह में बुलाए जाने की अटकलें हैं। इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय बैठकों का कार्यक्रम भी एक वजह बताया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 30 अगस्त को एससीओ बैठक के लिए किर्गिस्तान जाने और 3 सितंबर को वापस लौटने की बात कही गई है। इसके बाद 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें सभी ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्षों के शामिल होने की उम्मीद जताई गई है।
सितंबर के तीसरे सप्ताह में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक भी होनी है। हालांकि, इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका जाने का फैसला अभी नहीं हुआ है।
ऐसे में सितंबर का पहला सप्ताह महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने के लिए संसद बुलाने के लिहाज से उपयुक्त माना जा रहा है।
सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत का दावा
मानसून सत्र के दौरान सरकार की ओर से संविधान संशोधन से जुड़े विधेयकों को पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई से अधिक 366 सांसदों के समर्थन का दावा किया गया था।
दिए गए कंटेंट के अनुसार, लोकसभा की मौजूदा सदस्य संख्या 540 बताई गई है और दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।

हालांकि, सरकार की ओर से समर्थन करने वाली पार्टियों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। सत्ता पक्ष की ओर से एनसीपी (शरद पवार गुट) और डीएमके समेत कई दलों के विधेयक के समर्थन में आने के संकेत दिए जा रहे हैं।
अटकलें यह भी हैं कि कुछ राजनीतिक दल व्हिप जारी करने से बच सकते हैं। ऐसी स्थिति में उनके सांसदों के सदन में उपस्थित रहने और मतदान करने की बाध्यता नहीं होगी। इससे मतदान के दौरान अनुपस्थित रहने वाले सांसदों की संख्या बढ़ सकती है और दो-तिहाई बहुमत के लिए जरूरी संख्या प्रभावित हो सकती है। सियासी विशेषज्ञों का कहना है इस संसद का विशेष सत्र काफी हंगामेदार होने की संभावना है।
अप्रैल में भी विधेयक आगे बढ़ाने की कोशिश हुई थी
मानसून सत्र की तरह बजट सत्र का भी समापन नहीं किया गया था। इसके बाद 16 से 18 अप्रैल तक तीन दिनों का सत्र बुलाकर इन विधेयकों को पारित कराने की कोशिश की गई थी, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो सका।
अब सरकार की ओर से महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने की संभावनाओं के बीच विपक्ष ने पहले राजनीतिक दलों के साथ चर्चा की मांग उठाई है।
ऐसे में संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की स्थिति में परिसीमन और महिला आरक्षण दोनों ही प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बन सकते हैं।
आगे की राह
संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने के संकेतों के बीच परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सरकार जहां महिला आरक्षण कानून को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कह रही है, वहीं विपक्ष परिसीमन के प्रस्ताव पर पहले सर्वदलीय चर्चा की मांग कर रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार संसद को कब दोबारा बुलाती है और इन विधेयकों को लेकर क्या कदम उठाती है। (Amar Bharti)
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