582 करोड़ के चढ़ावे से लेकर चोरी के आरोपों तक… राम मंदिर ट्रस्ट ने क्यों बदला पूरा सिस्टम?

राम मंदिर ट्रस्ट ने पहली बार सार्वजनिक किया दान का पूरा लेखा-जोखा

नई दिल्ली/अमर भारती। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में कई बड़े फैसले लिए। ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्र के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। इसके साथ ही ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य कृष्णमोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया। वहीं मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने के लिए पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति का फैसला लिया गया।

यह निर्णय ऐसे समय आया है जब चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने मंदिर की वित्तीय और सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर खामियों की ओर संकेत किया है।

ट्रस्ट ने पहली बार सार्वजनिक किया दान का पूरा लेखा-जोखा

बैठक के दौरान ट्रस्ट ने मंदिर में प्राप्त दान और उसके उपयोग का विस्तृत वित्तीय विवरण भी सार्वजनिक किया।

ट्रस्ट के अनुसार-

  • कुल प्राप्त दान: 3,264 करोड़ रुपये
  • मंदिर निर्माण और पूंजीगत कार्यों पर खर्च: 2,370 करोड़ रुपये
  • रामलला के चढ़ावे के रूप में प्राप्त राशि: 582 करोड़ रुपये
  • संचालन और व्यवस्थाओं पर खर्च: 391 करोड़ रुपये
  • शेष राशि: ट्रस्ट के बैंक खातों में सुरक्षित

राम मंदिर ट्रस्ट ने यह भी बताया कि अब तक श्रद्धालुओं ने 2,926 वस्तुगत भेंट भी अर्पित की हैं, जिनका रिकॉर्ड तिथि अनुसार सुरक्षित रखा गया है। हर वर्ष स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म इनका भौतिक सत्यापन करती है।

चढ़ावा चोरी मामले ने बदली व्यवस्थाएं

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठे थे। इसी के बाद SIT का गठन किया गया, जिसकी रिपोर्ट में कई गंभीर कमियां सामने आईं।

SIT के अनुसार-

  • कर्मचारियों के बैंक खातों में आय से अधिक नकद जमा होने के संकेत मिले।
  • चोरी की रकम रिश्तेदारों के खातों में जमा करने और संपत्ति खरीदने की आशंका जताई गई।
  • विस्तृत आर्थिक जांच की सिफारिश की गई।
  • गणना कक्ष में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर पाई गई।
  • कर्मचारियों की जेब रहित वर्दी लागू नहीं थी।
  • निजी सामान ले जाने पर प्रभावी रोक नहीं थी।
  • बायोमीट्रिक प्रवेश प्रणाली लागू नहीं की गई थी।
  • CCTV निगरानी और रिकॉर्ड संरक्षण में भी गंभीर लापरवाही मिली।

SOP का पालन नहीं हुआ

SIT रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बीच बनाई गई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। 20 सितंबर 2024 और 6 फरवरी 2025 को जारी संयुक्त दिशा-निर्देशों की नियमित समीक्षा की जिम्मेदारी ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के पास थी, लेकिन जांच में पाया गया कि इसकी प्रभावी निगरानी नहीं की गई। इसी वजह से चोरी जैसी घटनाओं के लिए परिस्थितियां बनीं।

गणना प्रभारी पर गंभीर सवाल

रिपोर्ट में गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।

SIT के अनुसार-

  • सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू नहीं किए गए।
  • गणना कक्ष में प्रवेश नियंत्रण कमजोर रहा।
  • CCTV निगरानी पर्याप्त नहीं थी।
  • नकदी की गिनती के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल चांदी की ईंटों और अन्य बहुमूल्य भेंट के गायब होने के दावे जांच में सही नहीं पाए गए। जांच एजेंसियों के अनुसार सभी वस्तुएं रिकॉर्ड में सुरक्षित मिलीं।

अब होगा पेशेवर CEO का चयन

मंदिर प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और पेशेवर बनाने के लिए ट्रस्ट ने पहली बार CEO नियुक्त करने का निर्णय लिया है।

इसके लिए तीन सदस्यीय चयन समिति बनाई गई है।

समिति में शामिल हैं-

  • सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली
  • लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी
  • सुरेश हावड़े

शिरडी साईं मंदिर का अनुभव काम आएगा

समिति के सदस्य सुरेश हावड़े को मंदिर प्रशासन का लंबा अनुभव है।

वे लगभग दस वर्षों तक शिरडी साईं बाबा संस्थान के प्रबंधन से जुड़े रहे हैं।

ट्रस्ट का मानना है कि उनके अनुभव से राम मंदिर की व्यवस्थाओं में आधुनिक प्रबंधन प्रणाली लागू करने में मदद मिलेगी।

पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल भी निभाएंगे अहम भूमिका

समिति में शामिल विष्णुकांत चतुर्वेदी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल रह चुके हैं।

वर्तमान में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूतपूर्व सैनिक सेवा परिषद के अखिल भारतीय अध्यक्ष हैं।

उनकी प्रशासनिक और अनुशासनात्मक विशेषज्ञता को मंदिर प्रबंधन में उपयोगी माना जा रहा है।

22 जुलाई को होगी अगली अहम बैठक

ट्रस्ट ने घोषणा की है कि अगली बैठक 22 जुलाई को आयोजित होगी।

इस बैठक में-

  • CEO चयन प्रक्रिया की समीक्षा
  • SIT रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई
  • सुरक्षा व्यवस्था में सुधार
  • वित्तीय निगरानी प्रणाली

पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण ने ट्रस्ट की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि ट्रस्ट ने पहली बार सार्वजनिक रूप से दान का पूरा हिसाब जारी कर पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की है। साथ ही CEO नियुक्ति, नई प्रशासनिक व्यवस्था और SIT की सिफारिशों को लागू करने का निर्णय यह संकेत देता है कि ट्रस्ट भविष्य में सुरक्षा, वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करना चाहता है। (Amar Bharti)

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