शाकिब अल हसन पर बांग्लादेश सरकार सख्त: ‘घटिया इंसान’ बताया

शाकिब अल हसन को सुरक्षा मिलेगी लेकिन कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा

शाकिब अल हसन पर बांग्लादेश सरकार का बयान
शाकिब अल हसन को लेकर बांग्लादेश सरकार का सख्त लेकिन संतुलित रुख।

डिजिटल डेस्क, ढाका। बांग्लादेश के पूर्व क्रिकेट कप्तान और स्टार ऑलराउंडर शाकिब अल हसन एक बार फिर राजनीतिक विवादों के केंद्र में हैं। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने उन्हें लेकर तीखी टिप्पणी की है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि यदि वह देश लौटते हैं तो उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाएगी। हालांकि, सरकार का कहना है कि उन्हें अपने खिलाफ दर्ज मामलों का सामना कानूनी प्रक्रिया के तहत करना होगा।

शाकिब अल हसन को लेकर सरकार का कड़ा रुख

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सूचना और प्रसारण सलाहकार जाहिद उर रहमान ने सचिवालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शाकिब अल हसन को लेकर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि शाकिब भले ही अच्छे खिलाड़ी रहे हों, लेकिन उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का साथ दिया और अब भी उनके साथ जुड़े हुए हैं।

जाहिद उर रहमान ने कहा कि अगर शाकिब अल हसन बांग्लादेश लौटते हैं तो उन्हें सुरक्षा दी जाएगी। हालांकि, उन पर लगे आरोपों का सामना उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत करना होगा और कानून अपना काम करेगा।

राजनीति में आने के बाद बढ़ा विवाद

शाकिब अल हसन लंबे समय तक बांग्लादेश क्रिकेट का बड़ा चेहरा रहे। क्रिकेट करियर के दौरान उनका नाम देश के सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल रहा। बाद में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और 2023 में आवामी लीग में शामिल हो गए।

इसके बाद 2024 में वह सांसद चुने गए। इस दौरान उनकी नजदीकियां तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ लगातार चर्चा में रहीं। शाकिब अक्सर शेख हसीना के साथ तस्वीरें साझा करते थे और उन्हें ‘आपा’ कहकर संबोधित करते थे।

शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद बदले हालात

अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना सरकार का पतन हो गया। इसके बाद से शाकिब अल हसन विदेश में रह रहे हैं। उनके खिलाफ हत्या और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले दर्ज किए गए हैं।

हाल ही में दिल्ली में रह रहीं शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने की घोषणा की थी। इस संबंध में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शाकिब अल हसन भी मौजूद थे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से शेख हसीना के प्रति समर्थन और एकजुटता दिखाई।

यही वजह बताई जा रही है कि बांग्लादेश की मौजूदा सरकार की नाराजगी शाकिब के प्रति और बढ़ गई है।

सुरक्षा मिलेगी, लेकिन कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाहिद उर रहमान ने स्पष्ट किया कि यदि शाकिब अल हसन देश लौटते हैं तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि, उन्हें अपने खिलाफ दर्ज मामलों का सामना करना होगा।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हर नागरिक को संवैधानिक और कानूनी अधिकार प्राप्त हैं। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही होगी और अदालत का फैसला सभी के लिए मान्य होगा।

शेख हसीना को लेकर भी सरकार का वही रुख

जाहिद उर रहमान ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि शेख हसीना देश लौटती हैं तो उन्हें भी पूरी सुरक्षा दी जाएगी और उनके अधिकारों का सम्मान किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के सामने पेश किया जाएगा और अदालत जो फैसला देगी, उसका पालन किया जाएगा।

‘माफिया शासन’ नहीं चाहता बांग्लादेश

सूचना सलाहकार ने कहा कि बांग्लादेश दोबारा ऐसा शासन नहीं देखना चाहता जिसे उन्होंने “माफिया शासन” बताया। उन्होंने कहा कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना जरूरी है और भविष्य में किसी भी प्रकार का फासीवादी या माफिया शासन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि चाहे शाकिब अल हसन हों, शेख हसीना हों या किसी गंभीर अपराध के आरोपी, सभी को संविधान और कानून के तहत समान अधिकार मिलेंगे।

शाकिब अल हसन से सरकार की नाराजगी की वजह क्या है?

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बनी तारिक रहमान की सरकार आवामी लीग के खिलाफ मानी जाती है। ऐसे में शाकिब अल हसन को लेकर सरकार का रुख इसलिए सख्त बताया जा रहा है क्योंकि उन्होंने शेख हसीना से दूरी नहीं बनाई।

कंटेंट के अनुसार, 2025 में शाकिब ने शेख हसीना को जन्मदिन की बधाई दी थी। इसके बाद खेल सलाहकार ने कहा था कि वह दोबारा बांग्लादेश की जर्सी नहीं पहन पाएंगे। वहीं 5 अगस्त 2026 को शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के बाद उनके घर पर हमला हुआ और सरकार ने उनकी टीम में वापसी से भी इनकार कर दिया।

शाकिब अल हसन को लेकर विवाद अभी खत्म होता नहीं दिख रहा

शाकिब अल हसन का मामला अब केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं रह गया है। राजनीतिक घटनाक्रम, शेख हसीना से उनकी नजदीकियां और उनके खिलाफ दर्ज मामलों ने इस विवाद को और गहरा कर दिया है। फिलहाल बांग्लादेश सरकार का रुख साफ है कि देश लौटने पर उन्हें सुरक्षा मिलेगी, लेकिन उन्हें कानूनी प्रक्रिया का सामना भी करना होगा। (Amar Bharti)

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