PM के 2014 के विजन का उल्लेख किया, कहा-विकास के केंद्र में चार प्रमुख वर्ग हैं – नारी, गरीब, युवा और किसान

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित एक विस्तृत प्रेस वार्ता में योगी आदित्यनाथ ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विपक्ष पर जोरदार हमला बोला। उनके साथ केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी मौजूद रहीं। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी ने संसद में विपक्ष के आचरण की तुलना महाभारत के द्रौपदी चीरहरण प्रसंग से करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया और कहा कि यह महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह संवाद विशेष रूप से संसद में इंडी गठबंधन के रवैये और नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर देशभर में मिल रही प्रतिक्रियाओं को लेकर आयोजित किया गया है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के “नारी विरोधी आचरण” के कारण देश की आधी आबादी में गहरा आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और उसके सहयोगी दल—समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके—ने मिलकर इस ऐतिहासिक विधेयक को बाधित करने की कोशिश की और संसद में अनुचित व्यवहार किया।
सीएम योगी ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 के उस विजन का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने देश के विकास के केंद्र में चार प्रमुख वर्ग—नारी, गरीब, युवा और किसान—को रखा था। योगी ने कहा कि यह सोच पारंपरिक जातिवादी राजनीति से अलग है और उन दलों के लिए चुनौती है, जिन्होंने वर्षों तक जाति और तुष्टिकरण की राजनीति के आधार पर सत्ता का उपभोग किया। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि जब-जब केंद्र सरकार ने कोई प्रगतिशील और सुधारवादी कदम उठाया, विपक्ष ने उसका विरोध किया।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विस्तार से बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कानून देश की महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक रूप से इसे लागू करने की समयसीमा 2034 तक मानी जा रही थी, लेकिन महिला संगठनों और सामाजिक समूहों की मांग पर केंद्र सरकार ने इसे 2029 तक लागू करने के लिए संशोधन लाने का निर्णय लिया। इसके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया गया और सभी पक्षों से व्यापक चर्चा की गई।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अधिनियम के तहत किसी भी राज्य का अधिकार कम नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए अतिरिक्त सीटों का सृजन किया जाएगा, जिससे मौजूदा प्रतिनिधित्व प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने यह भी बताया कि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का संतुलन तय किया जाएगा और उत्तर, दक्षिण तथा पूर्व भारत के सभी राज्यों में समान अनुपात में वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों द्वारा उठाई गई आशंकाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को आश्वस्त किया है कि उनके अधिकारों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी।
संसद में विपक्ष के आचरण पर कड़ी टिप्पणी करते हुए सीएम योगी ने कहा कि इंडी गठबंधन का रवैया बेहद निराशाजनक रहा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार की टिप्पणियां और व्यवधान सदन में देखने को मिले, वह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं थे। उन्होंने इस स्थिति की तुलना महाभारत के द्रौपदी चीरहरण से करते हुए कहा कि “भरी सभा में जिस तरह द्रौपदी का अपमान हुआ था, उसी तरह का दृश्य सदन में देखने को मिला,” जो देश के लोकतंत्र और महिलाओं के सम्मान के लिए चिंताजनक है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर यह आरोप भी लगाया कि वह मुद्दे को भटकाने के लिए मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग उठा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता और यह सिद्धांत संविधान निर्माण के समय ही तय कर दिया गया था। इस संदर्भ में उन्होंने भीमराव अंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने धर्म आधारित आरक्षण का विरोध किया था और देश को विभाजनकारी नीतियों से दूर रखने की बात कही थी। साथ ही सरदार वल्लभभाई पटेल सहित अन्य नेताओं ने भी इस विचार को खारिज किया था।
प्रेस वार्ता के दौरान केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी तुष्टिकरण की राजनीति करती है और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग उठाकर समाज को बांटने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे ऐतिहासिक अवसर पर विपक्ष ने महिलाओं की अपेक्षाओं को आहत किया और उस दिन को “काला दिन” बनाने की कोशिश की।
अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि देशभर में महिलाएं इस मुद्दे को लेकर नाराज हैं और विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में महिलाएं अपने मताधिकार का प्रयोग कर ऐसे दलों को जवाब देंगी, जो उनके अधिकारों के रास्ते में बाधा बनते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और यह अधिनियम उसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
प्रेस वार्ता के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष से अपील की कि वह राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर महिलाओं के हित में इस कानून का समर्थन करे। उन्होंने कहा कि यदि यह विधेयक सर्वसम्मति से पारित होता, तो पूरे सदन को इसका श्रेय मिलता और देश की महिलाओं को समय पर उनका अधिकार मिल पाता। लेकिन विपक्ष के रवैये ने इस प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से विवादित बना दिया।
कुल मिलाकर, इस प्रेस वार्ता के माध्यम से भाजपा नेतृत्व ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। वहीं, विपक्ष पर लगाए गए आरोपों के जरिए यह भी स्पष्ट किया गया कि आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बना रह सकता है।