‘जबतक जनगणना पूरी नहीं हो जाती तबतक महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा नहीं की जा सकती.’

लखनऊ: संसद में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का घमासान मचा हुआ है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देश के नाम संबोधन के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी केन्द्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. अखिलेश यादव ने एक प्रेस वार्ता आयोजित कर कहा कि ‘भाजपा का असली मकसद महिलाओं को सम्मान देना नहीं, बल्कि उन्हें चुनावी नारा बनाना है.’उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जब कल रात 8 बजे प्रधानमंत्री के संबोधन की खबर आई, तो सब को लगा कि शायद किसी महिला को प्रधानमंत्री बनाने का ऐतिहासिक ऐलान होगा, लेकिन हाथ सिर्फ मायूसी लगी. उनका मानना है कि यह बिल ‘आधी आबादी’ को हक देने के बहाने समाज को बांटने की एक सोची-समझी रणनीति है.
अखिलेश यादव ने इस कदम को ‘तथाकथित महिला बिल’ करार देते हुए कहा कि जनता के गुस्से को दबाने के लिए इसे जल्दबाजी में लाया गया है. उन्होंने सीधा सवाल दागा कि जिस पार्टी ने अपने संगठन के भीतर महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया, वह देश की 33 प्रतिशत महिलाओं को क्या अधिकार देगी? उनके अनुसार, बिल का असल उद्देश्य महिलाओं को सशक्त करना नहीं, बल्कि उन्हें आपस में बांटना है.
भाजपा की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए अखिलेश ने कहा कि यह पार्टी पहले लोगों को बांटती है और फिर उन्हें डराकर अपने पाले में लाने की कोशिश करती है, लेकिन अब यह भय का खेल जनता के बीच नहीं चलने वाला. भाजपा अब यही फॉर्मूला महिलाओं के साथ भी अपना रही है. हालांकि, पुरानी सोच वाली महिलाओं को तो शायद वे गुमराह कर लें, लेकिन आज के दौर की जागरूक और पढ़ी-लिखी बेटियां अब इनके बहकावे में नहीं आने वाली.
PDA समाज को तोड़ने की साजिश कर रही सरकार
पूर्व मुख्यमंत्री ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को याद करते हुए कहा कि बाबा साहब ने जनगणना का नियम दिया था लेकिन मौजूदा सरकार इससे लगातार भाग रही है. यह पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज को कमज़ोर करने की साजिश लगती है. अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी आधी आबादी को हक़ और सम्मान देने के पक्ष में तो है लेकिन इसमें पिछड़े और दलित वर्ग की महिलाओं के लिए विशेष हक़ की बात होनी चाहिए. उन्होने स्पष्ट किया कि वे बिल के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि सरकार की मंशा पर उन्हें शक है.
सपा मुखिया ने सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किये. अखिलेश यादव ने कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर महिलाओं क उनका वास्तविक अधिकार भला कैसे मिल पाएगा? उन्होनें दावा किया कि इस बिल को जल्दबाज़ी में लाने का असली मक़सद जातिगत जनगणना को रोकना है क्योंकि जनगणना होने पर सरकार को हर वर्ग की असली आबादी बतानी पड़ेगी.
अंत में लखनऊ के चिर-परिचित अंदाज में अखिलेश ने कहा कि जनता अब इन राजनीतिक चालों को बखूबी समझ चुकी है. बिना जातिगत जनगणना और पिछड़े-दलित वर्गों की महिलाओं को ‘आरक्षण के भीतर आरक्षण’ दिए बिना, इस बिल का कोई जमीनी लाभ नहीं दिखेगा.