बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विरोध में 230, आवश्यक दो-तिहाई बहुमत (352 वोट) न मिलने से गिरा बिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के पारित न हो पाने पर दुख जताते हुए पीएम ने कहा कि देश की नारी शक्ति और उनके सपनों के साथ खिलवाड़ किया गया है।
विपक्ष पर तीखा हमला:
“संविधान के अपराधी”प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके सहित ‘INDIA’ गठबंधन के दलों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “देश देख रहा है कि कैसे महिलाओं की आकांक्षाओं को कुचला गया। जब बिल गिर गया, तब कुछ लोग सदन में मेजें थपथपाकर जश्न मना रहे थे। ये लोग संविधान और महिला सशक्तिकरण के अपराधी हैं।
“बिल क्यों गिरा?
17 अप्रैल (शुक्रवार) की रात लोकसभा में हुए मतदान में बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विरोध में 230 सदस्यों ने मतदान किया। संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत (352 वोट) न मिल पाने के कारण यह ऐतिहासिक बिल पारित नहीं हो सका।
संबोधन की मुख्य बातें:
नारी शक्ति का अपमान: पीएम ने कहा कि विपक्षी दलों ने हमेशा महिला आरक्षण की राह में रोड़े अटकाए हैं। कांग्रेस का इतिहास महिलाओं को उनके हक से वंचित रखने का रहा है।
परिसीमन का मुद्दा: सरकार का लक्ष्य 2029 के चुनावों से पहले लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करना था, ताकि महिलाओं को 33% आरक्षण सुनिश्चित किया जा सके, लेकिन विपक्ष ने इसे ‘छिपा हुआ एजेंडा’ बताकर विरोध किया।
साफ़ नीयत की बात: प्रधानमंत्री ने दोहराया कि उनकी सरकार “साफ़ नीयत और स्पष्ट इरादे” के साथ महिलाओं को देश के विकास में बराबर का भागीदार बनाने की कोशिश कर रही थी।”ये 21वीं सदी की नारी का समय है। हम पीछे नहीं हटेंगे। महिला आरक्षण आज की ज़रूरत है और इसके लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी।” — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
क्या था 131वां संशोधन बिल?
इस विधेयक का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना था। इसके लिए 2011 की जनगणना के आधार पर नए सिरे से परिसीमन (Delimitation) प्रस्तावित था, जिसे विपक्षी दलों ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इससे दक्षिण भारतीय राज्यों की हिस्सेदारी कम हो जाएगी।