पॉलिमर मुद्रा वाले आधुनिक देशों की सूची में शामिल होगा भारत, जल्द जारी होगी प्लास्टिक करंसी

छपाई की लंबी अवधि की लागत कम होगी, पॉलिमर नोट्स की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया से हुई थी

भारत जल्द ही अपनी करेंसी को और अधिक टिकाऊ बनाने जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) पॉलिमर नोट्स लाने का प्रस्ताव गंभीरता से विचार कर रहा है। ये नोट पारंपरिक कागजी नोटों की जगह विशेष प्लास्टिक फिल्म से बनेंगे, जो पानी में भी खराब नहीं होते और जल्दी फटते नहीं हैं।

आरबीआई गवर्नर का बयान

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में कहा कि पॉलिमर नोट्स लाने का प्रस्ताव केंद्रीय बैंक के समक्ष विचाराधीन है। फिलहाल यह विचार प्रारंभिक चरण में है। कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। आरबीआई इस पर विस्तृत आकलन कर रहा है। जैसे ही कोई फैसला होगा, जनता को सूचित किया जाएगा।

2014 का परीक्षण और असफलता

इससे पहले फरवरी 2014 में सरकार ने संसद को बताया था कि 10 रुपये के एक अरब पॉलिमर नोट्स का परीक्षण पांच शहरों—कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर—में किया जाएगा। लेकिन तकनीकी और परिचालन संबंधी समस्याओं के कारण इस परियोजना को रोक दिया गया था। अब नए सिरे से इस पर काम शुरू हो गया है।

नोट्स का मटेरियल और विशेषताएं

ये नोट पूरी तरह प्योर प्लास्टिक नहीं बल्कि BOPP (Biaxially Oriented Polypropylene) नामक विशेष पतली और लचीली प्लास्टिक फिल्म से बनाए जाएंगे। छोटी हेडलाइंस:ये आम कागजी नोटों (कपास-लिनन) से कई गुना ज्यादा मजबूत होते हैं।

  • पानी, धोने या वॉशिंग मशीन में पड़ने पर भी खराब नहीं होते।
  • नोट थोड़े चिकने होते हैं लेकिन गर्मी या धूप में नहीं पिघलते।
  • विशेष कोटिंग की जाती है ताकि स्याही लंबे समय तक टिकी रहे।

ये सामान्य प्लास्टिक बैग या पीवीसी से काफी अलग होते हैं और कागज जितने पतले लेकिन बहुत अधिक टिकाऊ होते हैं।

दुनिया के कई देश पहले से इस्तेमाल कर चुके हैं

पॉलिमर नोट्स की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया से हुई थी। इसके बाद यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, न्यूजीलैंड, सिंगापुर समेत कई देशों ने इसे सफलतापूर्वक अपनाया है। इन देशों में नकली नोट कम हुए और नोटों की उम्र बढ़ गई।

भारत के लिए फायदे और चुनौतियां

नोटों की छपाई की लंबी अवधि की लागत कम होगी। सुरक्षा फीचर्स को और बेहतर बनाया जा सकता। शुरुआती चरण में प्रिंटिंग और अन्य बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने की जरूरत पड़ेगी।

आरबीआई सभी पहलुओं का अध्ययन कर रहा है। अगर सबकुछ सही रहा तो भारत भी पॉलिमर मुद्रा वाले आधुनिक देशों की सूची में शामिल हो जाएगा। यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था और आम लोगों दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

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