मोदी युग @4399: गुजरात से दिल्ली तक का सफ़र कितना चुनौतीपूर्ण रहा? पढ़िए स्पेशल रिपोर्ट

नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर संघ के स्वयंसेवक से भारत के प्रधानमंत्री बनने तक का है। जानिए उनके 12 वर्षों के शासन, प्रमुख फैसलों और वैश्विक पहचान की पूरी कहानी।

नई दिल्ली/अमर भारती। भारतीय राजनीति के इतिहास में कुछ ऐसे नेता हुए हैं जिन्होंने न केवल चुनावी राजनीति को प्रभावित किया बल्कि देश की दिशा और वैश्विक पहचान को भी नई परिभाषा दी। प्रधानमंत्री Narendra Modi का नाम ऐसे ही नेताओं में शामिल है। एक साधारण परिवार से निकलकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक, भारतीय जनता पार्टी के संगठनकर्ता, गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री बनने तक का उनका सफर भारतीय लोकतंत्र की सबसे चर्चित राजनीतिक यात्राओं में से एक माना जाता है।

शुरुआती जीवन और संघ से जुड़ाव

17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में जन्मे नरेंद्र मोदी का बचपन सामान्य आर्थिक परिस्थितियों में बीता। कम उम्र में ही उनका झुकाव सामाजिक और राष्ट्रवादी गतिविधियों की ओर हुआ। युवावस्था में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और संगठन के पूर्णकालिक प्रचारक बने। संघ में रहते हुए उन्होंने संगठन निर्माण, जनसंपर्क और नेतृत्व कौशल को नजदीक से सीखा। यही अनुभव आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन की मजबूत नींव साबित हुआ। 1980 के दशक में उन्हें भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी गईं और धीरे-धीरे वे पार्टी के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल हो गए।

गुजरात की राजनीति में उभार

साल 2001 नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन का बड़ा मोड़ साबित हुआ। उन्हें गुजरात का मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। उस समय राज्य कई प्रशासनिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा था। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और निवेश आकर्षित करने पर विशेष जोर दिया। गुजरात में आयोजित “वाइब्रेंट गुजरात” निवेश सम्मेलन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना। लगातार चार बार मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद मोदी की पहचान एक प्रभावशाली प्रशासक और चुनावी नेता के रूप में स्थापित हो गई।

2014: राष्ट्रीय राजनीति में ऐतिहासिक प्रवेश

2014 के लोकसभा चुनाव भारतीय राजनीति के लिए निर्णायक साबित हुए। भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और पूर्ण बहुमत हासिल किया। लगभग तीन दशकों बाद किसी एक पार्टी को लोकसभा में स्पष्ट बहुमत मिला था। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सरकार ने प्रशासनिक सुधार, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और वित्तीय समावेशन पर जोर दिया। इसी दौर में प्रधानमंत्री जनधन योजना, स्वच्छ भारत मिशन, मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी पहलें शुरू की गईं।

बड़े फैसले और राजनीतिक प्रभाव

मोदी सरकार के कार्यकाल में कई ऐसे फैसले लिए गए जिन्होंने देशव्यापी बहस को जन्म दिया। इनमें वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू करना, नोटबंदी, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) प्रमुख रहे। समर्थकों के अनुसार इन फैसलों का उद्देश्य प्रशासनिक सुधार, राष्ट्रीय एकीकरण और आर्थिक बदलाव था, जबकि आलोचकों ने इनके प्रभावों और कार्यान्वयन को लेकर सवाल उठाए। इसके बावजूद मोदी की राजनीतिक लोकप्रियता पर इसका सीमित असर दिखाई दिया और 2019 के चुनाव में भाजपा ने पहले से अधिक सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की।

कल्याणकारी योजनाओं पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कई ऐसी योजनाएं शुरू की गईं जिन्हें सरकार गरीब और मध्यम वर्ग के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानती है। उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन, आयुष्मान भारत के माध्यम से स्वास्थ्य बीमा, पीएम आवास योजना, जल जीवन मिशन और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं करोड़ों लोगों तक पहुंचीं। डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने देश को दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान बाजारों में शामिल कर दिया।

वैश्विक मंच पर बढ़ती पहचान

विदेश नीति के क्षेत्र में नरेंद्र मोदी की सक्रियता भी चर्चा में रही। अमेरिका, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने के प्रयास किए गए। भारत की G20 अध्यक्षता और नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी कूटनीतिक सफलता माना गया। मोदी को कई देशों द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया गया, जिसे भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का प्रतीक माना गया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी उपस्थिति ने भारत की विदेश नीति को अधिक सक्रिय और बहुआयामी स्वरूप देने में योगदान दिया।

2024 और उसके बाद

2024 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाई। इसके साथ ही वे स्वतंत्र भारत के उन चुनिंदा प्रधानमंत्रियों में शामिल हो गए जिन्होंने लगातार तीन कार्यकाल तक देश का नेतृत्व किया। आज नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। समर्थक उन्हें निर्णायक नेतृत्व और विकासोन्मुख राजनीति का चेहरा मानते हैं, जबकि आलोचक उनकी नीतियों पर सवाल उठाते रहते हैं। लेकिन यह निर्विवाद है कि पिछले एक दशक से अधिक समय में उन्होंने भारतीय राजनीति, शासन व्यवस्था और वैश्विक मंच पर भारत की छवि को गहराई से प्रभावित किया है। स्वयंसेवक से प्रधानमंत्री तक का उनका सफर न केवल राजनीतिक सफलता की कहानी है, बल्कि यह आधुनिक भारत की बदलती राजनीतिक संस्कृति और नेतृत्व शैली को भी दर्शाता है।

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