क्या टूट गया बिहार का भरोसा? सत्ता के लालच में बिहार और JDU को किया दरकिनार?

पटना/नई दिल्ली, 11 अप्रैल 2026: बिहार के सुशासन बाबू नीतीश कुमार को विपक्ष लंबे समय से “पलटूराम” कहकर पुकारता रहा है। लेकिन उनके समर्थक और विश्लेषक इसे “मास्टर स्ट्रैटेजिस्ट” का दूसरा नाम मानते हैं। आज राज्यसभा में शपथ लेते हुए नीतीश कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राजनीति में लचीलेपन का अपना महत्व है।नीतीश कुमार ने पिछले दो दशक में कई बार गठबंधन बदले – कभी NDA के साथ, कभी महागठबंधन के साथ। हर बार का फैसला उन्होंने बिहार के हित में बताया। चाहे सड़कों का जाल बिछाना हो, महिला सशक्तिकरण हो, या कानून-व्यवस्था सुधारना – हर पलट ने अंततः बिहार को कुछ न कुछ नया दिया।
नीतीश कुमार ने शपथ ग्रहण के बाद कहा:
“राजनीति में बदलाव आते रहते हैं। लेकिन मेरा लक्ष्य एक ही है – बिहार का विकास। जो भी गठबंधन करूं, वो बिहार के गरीब, किसान, महिला और युवा के लिए होगा।
पटना/नई दिल्ली, 11 अप्रैल 2026: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जिन्हें पूरे देश में “पलटूराम” के नाम से जाना जाता है, ने आज राज्यसभा में शपथ ग्रहण कर लिया। यह उनका राजनीतिक करियर का एक और बड़ा पलट है। विपक्षी दलों ने तुरंत तीखी प्रतिक्रिया दी। RJD नेता तेजस्वी यादव ने कहा, “नीतीश जी का पलटना अब कोई नई बात नहीं रही। जब तक सत्ता मिलती है, वो किसी भी गठबंधन में चले जाते हैं। बिहार की जनता इनके पलटों से थक चुकी है।”JD(U) के पुराने कार्यकर्ताओं में भी मायूसी दिख रही है।
एक वरिष्ठ कार्यकर्ता (नाम गोपनीय) ने कहा, “हम 20 साल से इनके साथ हैं। हर बार जब वो पलटते हैं, हमें लगता है कि अब स्थिरता आएगी। लेकिन हर 5-7 साल में नया नाटक शुरू हो जाता है। इस बार भी सत्ता बचाने के लिए राज्यसभा का रास्ता चुना। बिहार का विकास कहाँ है, बस कुर्सी बच रही है।”
महिला कार्यकर्ता सुनीता देवी (जिन्होंने पहले नीतीश जी की तारीफ की थी) निराश नजर आईं और बोलीं,
“पहले कहते थे ‘बिहार मेरे दिल में है’, अब दिल्ली भाग गए। शराबबंदी, सात निश्चय सब दिखावा लगने लगा। पलटूराम नाम सही है – हर बार पलट जाते हैं।”
वहीं विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार का यह कदम साफ तौर पर सत्ता की राजनीति है। 2005 से अब तक उन्होंने NDA, महागठबंधन, फिर NDA… इस तरह कई बार गठबंधन बदले हैं। हर पलट के बाद बिहार की जनता को नया-नया वादा दिया जाता है, लेकिन ग्राउंड पर स्थिति ज्यादा नहीं बदलती। बेरोजगारी, पलायन और युवाओं का निराश होना अभी भी बिहार की बड़ी समस्या बनी हुई है।नीतीश कुमार ने शपथ के बाद कहा, “बिहार मेरे दिल में है”, लेकिन विपक्ष पूछ रहा है – “क्या दिल में बिहार है या सिर्फ सत्ता का लालच?”बिहार की राजनीति में “पलटूराम” का यह नया पलट एक बार फिर साबित कर रहा है कि नीतीश कुमार के लिए सत्ता से ऊपर कुछ नहीं। फिलहाय यह देखना बाकी है कि नीतीश कुमार का यह कदम बिहार की जनता को कितना रास आता है?