NCERT पाठ्यक्रम में जयप्रकाश नारायण आंदोलन, मौलिक अधिकारों और प्रेस सेंसरशिप को भी मिली जगह

नई दिल्ली/अमर भारती। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और चर्चित बदलाव करते हुए NCERT आपातकाल पाठ्यक्रम के तहत पहली बार 1975-77 के आपातकाल (Emergency) को कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में शामिल किया है। नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत किए जा रहे पाठ्यक्रम सुधारों के अंतर्गत यह फैसला लिया गया है। इससे पहले आपातकाल का विषय मुख्य रूप से कक्षा 12 की राजनीति विज्ञान की पुस्तकों तक सीमित था, लेकिन अब विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर पर ही भारतीय लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण अध्याय से परिचित कराया जाएगा।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि NCERT आपातकाल पाठ्यक्रम में यह बदलाव छात्रों को लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की गहरी समझ विकसित करने में मदद करेगा।
NCERT आपातकाल पाठ्यक्रम में पहली बार शामिल हुआ Emergency
NCERT की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक ‘Understanding Society: India and Beyond’ (भाग-1) में आपातकाल को विशेष रूप से शामिल किया गया है। यह विषय पुस्तक के अध्याय 6 में लोकतंत्र और उसके सामने आने वाली चुनौतियों के संदर्भ में पढ़ाया जाएगा।
पुस्तक में बताया गया है कि जून 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने देश में आपातकाल लागू किया था। उस समय देश महंगाई, बेरोजगारी, राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ते जन-असंतोष जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा था।
NCERT का उद्देश्य छात्रों को केवल घटनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्व और उसकी चुनौतियों को समझाना भी है।
लोकतंत्र की चुनौतियों को समझाएगा NCERT आपातकाल पाठ्यक्रम
नई पुस्तक में लोकतंत्र को केवल शासन प्रणाली के रूप में नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी और अधिकारों से जुड़ी व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
NCERT आपातकाल पाठ्यक्रम के अंतर्गत छात्रों को यह समझाया जाएगा कि लोकतंत्र के सामने समय-समय पर किस प्रकार की चुनौतियां आती हैं और संवैधानिक संस्थाएं उन चुनौतियों का सामना कैसे करती हैं।
पाठ्यक्रम में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना बताया गया है, जिसने देश की राजनीति और लोकतांत्रिक संस्थाओं को गहराई से प्रभावित किया।
मौलिक अधिकारों और प्रेस सेंसरशिप का भी उल्लेख
नई पाठ्यपुस्तक में आपातकाल के दौरान उठाए गए कई महत्वपूर्ण कदमों का उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि उस अवधि में कुछ मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था।
इसके अलावा प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई थी और कई राजनीतिक नेताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। पुस्तक में इन घटनाओं को भारतीय लोकतंत्र के विकास और संवैधानिक बहस के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों को इन तथ्यों से परिचित कराने से वे नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के महत्व को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
जयप्रकाश नारायण आंदोलन को भी मिली अहम जगह
NCERT आपातकाल पाठ्यक्रम में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले आंदोलन का भी उल्लेख किया गया है।
पुस्तक में बिहार और गुजरात में छात्रों तथा आम नागरिकों की भागीदारी का जिक्र करते हुए बताया गया है कि यह आंदोलन लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक सुधारों की मांग को लेकर आगे बढ़ा था।
छात्रों को यह भी बताया जाएगा कि आपातकाल समाप्त होने के बाद 1977 में आम चुनाव कराए गए, जिनमें जनता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपना फैसला सुनाया।
कक्षा 12 से कक्षा 9 तक पहुंचा महत्वपूर्ण विषय
अब तक आपातकाल का विस्तृत अध्ययन केवल कक्षा 12 की राजनीति विज्ञान की किताबों में कराया जाता था। लेकिन NCERT आपातकाल पाठ्यक्रम के तहत अब इसे कक्षा 9 में भी शामिल कर दिया गया है।
शिक्षाविदों का मानना है कि इससे छात्रों को कम उम्र में ही भारतीय राजनीतिक इतिहास, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संविधान की भूमिका को समझने का अवसर मिलेगा।
यह कदम नई शिक्षा नीति के उस लक्ष्य के अनुरूप माना जा रहा है, जिसमें छात्रों को केवल परीक्षा केंद्रित शिक्षा नहीं बल्कि वास्तविक सामाजिक और ऐतिहासिक समझ देने पर जोर दिया गया है।
‘Democracy and You’ सेक्शन बना बड़ा आकर्षण
नई पुस्तक में पहली बार ‘Democracy and You’ नामक विशेष खंड भी जोड़ा गया है। यह खंड छात्रों को लोकतंत्र और नागरिक जिम्मेदारियों से जोड़ने का प्रयास करता है।
इसमें विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि लोकतंत्र केवल मतदान या चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सक्रिय भागीदारी, जागरूकता और जिम्मेदार नागरिकता भी लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आपातकाल के अनुभवों को साझा करते हुए राष्ट्र का महत्व और राष्ट्र के प्रति एक नागरिक और सरकार के कर्तव्यों की समझ भी इस पाठ्यक्रम के जरिए मिलेगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया सेक्शन छात्रों में लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में मदद करेगा।
नई शिक्षा नीति के तहत बड़ा शैक्षिक बदलाव
NCERT आपातकाल पाठ्यक्रम को नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत लागू किए जा रहे व्यापक पाठ्यक्रम सुधारों का हिस्सा माना जा रहा है।
नई शिक्षा नीति का उद्देश्य छात्रों को रटने वाली शिक्षा से हटाकर विश्लेषणात्मक, आलोचनात्मक और व्यावहारिक सोच की ओर बढ़ाना है। इसी उद्देश्य के तहत भारतीय इतिहास, संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को नए तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।
शिक्षा जगत के कई विशेषज्ञों ने इस बदलाव का स्वागत किया है और इसे नागरिक शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है।
लोकतांत्रिक इतिहास को समझने की नई पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि NCERT आपातकाल पाठ्यक्रम में आपातकाल को शामिल करने से विद्यार्थियों को भारतीय लोकतंत्र के विकास, उसकी चुनौतियों और संवैधानिक मूल्यों की बेहतर समझ मिलेगी।
यह विषय छात्रों को यह समझने में मदद करेगा कि लोकतंत्र केवल एक राजनीतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों, स्वतंत्रता, जवाबदेही और संवैधानिक संस्थाओं के संतुलन पर आधारित व्यवस्था है।
NCERT आपातकाल पाठ्यक्रम क्यों है महत्वपूर्ण?
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और उसकी लोकतांत्रिक यात्रा कई महत्वपूर्ण घटनाओं से होकर गुजरी है। 1975-77 का आपातकाल भी ऐसी ही एक ऐतिहासिक घटना रही है, जिसने देश की राजनीति, प्रशासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्रभावित किया।
NCERT आपातकाल पाठ्यक्रम के जरिए अब नई पीढ़ी को इस महत्वपूर्ण अध्याय से परिचित कराया जाएगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों में संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और नागरिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
नई शिक्षा नीति के तहत किया गया यह बदलाव भारतीय लोकतंत्र के इतिहास को समझने और छात्रों को जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम माना जा रहा है। (Amar Bharti)
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