E20 Petrol पर बोले केजरीवाल – ‘प्रयोग होता है सीमित स्तर पर, पूरे देश पर नहीं’

नई दिल्ली। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। अब आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार बिना पर्याप्त परीक्षण के पूरे देश की जनता पर 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20 Petrol) थोप रही है। उन्होंने दावा किया कि इस ईंधन के कारण लाखों वाहनों को नुकसान पहुंच रहा है और सरकार इसे “प्रयोग” बताकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो संदेश जारी करते हुए केजरीवाल ने कहा कि E20 पेट्रोल को लेकर आम लोगों में भारी नाराजगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले सुप्रीम कोर्ट में इसे एक “प्रयोग” बता रही थी और बाद में मीडिया में मामला उठने पर अपने बयान से पीछे हट गई।
‘प्रयोग होता है सीमित स्तर पर, पूरे देश पर नहीं’
केजरीवाल ने कहा कि किसी भी नई तकनीक या नीति का प्रयोग पहले सीमित स्तर पर किया जाता है। आमतौर पर 100, 500 या 1000 वाहनों पर परीक्षण कर उसके परिणामों का विश्लेषण किया जाता है। लेकिन केंद्र सरकार ने पूरे देश में करोड़ों वाहनों के लिए E20 पेट्रोल लागू कर दिया और अब इसे प्रयोग बता रही है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “अगर यह वास्तव में एक प्रयोग है तो फिर 140 करोड़ भारतीयों और करोड़ों वाहन मालिकों को इसका हिस्सा क्यों बनाया गया? क्या सरकार इसके संभावित नुकसान की जिम्मेदारी लेगी?”
‘गाड़ियां खराब होंगी तो मुआवजा कौन देगा?’
AAP प्रमुख ने केंद्र सरकार से सीधा सवाल किया कि यदि E20 पेट्रोल के कारण लोगों के वाहन खराब होते हैं तो क्या सरकार उन्हें मुआवजा देगी? उन्होंने कहा कि जनता की चिंताओं को सुनना और उनके हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
केजरीवाल ने यह भी घोषणा की कि वह जल्द ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर E20 नीति वापस लेने की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक इसके प्रभावों पर पूरी वैज्ञानिक स्पष्टता नहीं आ जाती, तब तक इसे पूरे देश में लागू नहीं किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर साधा निशाना
केजरीवाल ने दावा किया कि 30 जून को केंद्र सरकार ने अटॉर्नी जनरल के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि E20 पेट्रोल का प्रभाव अभी अध्ययन के दौर में है और आगे की नीति परिणामों पर निर्भर करेगी। हालांकि, बाद में सरकार ने मीडिया रिपोर्ट्स को गलत बताते हुए कहा कि उसने ऐसा कोई बयान नहीं दिया।
इसी मुद्दे को लेकर केजरीवाल ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और कहा कि जनता के सामने तथ्यों को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
कर्नाटक सरकार ने भी उठाए सवाल
इससे पहले कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे भी E20 पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण, सार्वजनिक परामर्श और आम सहमति के करोड़ों भारतीयों को इस नई ईंधन नीति का हिस्सा बना दिया गया है।
खड़गे ने भी सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से पेश दलीलों का हवाला देते हुए कहा था कि सरकार स्वयं मान रही है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन के प्रभावों का मूल्यांकन अभी जारी है।
क्या है केंद्र सरकार का पक्ष?
विवाद बढ़ने के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने साफ किया है कि E20 पेट्रोल कार्यक्रम पूरी तरह वैज्ञानिक परीक्षणों पर आधारित है और इसकी लगातार निगरानी की जा रही है।
सरकार का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम की शुरुआत वर्ष 2003 में हुई थी। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना, किसानों को लाभ पहुंचाना और प्रदूषण में कमी लाना है।
मंत्रालय के अनुसार, यह कार्यक्रम किसी एक दिन में लागू नहीं किया गया, बल्कि वर्षों तक तकनीकी परीक्षण, वाहन निर्माताओं से सलाह और विभिन्न हितधारकों से चर्चा के बाद चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया। वर्ष 2023 से 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) को अंतिम चरण के रूप में लागू किया गया।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
इस पूरे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया, जिसमें ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को एथेनॉल सप्लाई का कोटा बढ़ाने के लिए कहा गया था। मामले की आगे भी सुनवाई जारी रहेगी।
E20 पेट्रोल क्या है?
E20 Petrol ऐसा ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। सरकार का दावा है कि इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है, विदेशी तेल पर निर्भरता घटती है और गन्ना किसानों को अतिरिक्त आय मिलती है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों और विपक्षी दलों का कहना है कि पुराने वाहनों पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर अभी और व्यापक अध्ययन की जरूरत है।
राजनीति से लेकर अदालत तक पहुंचा विवाद
फिलहाल E20 Petrol को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ विपक्ष सरकार पर बिना पर्याप्त तैयारी के नीति लागू करने का आरोप लगा रहा है, तो दूसरी ओर केंद्र सरकार इसे वैज्ञानिक, पर्यावरण हितैषी और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। अब इस मुद्दे पर सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी है। (Amar Bharti)
यह भी पढ़ें
ममता बनर्जी को बड़ा झटका: चंद्रिमा भट्टाचार्य का सभी पदों से इस्तीफा, 3 दिन में TMC में कई भूचाल