पेपर लीक पर 5 बड़े बदलाव: 10 साल तक की सजा, ₹10 करोड़ जुर्माना और 3 महीने में ट्रायल

पेपर लीक पर 5 बड़े बदलाव: पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव

पेपर लीक कानून में 10 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रस्ताव
प्रस्तावित संशोधन विधेयक में पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट और सख्त सजा का प्रावधान है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पेपर लीक और परीक्षा में नकल पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 लोकसभा में पेश करने जा रही है। प्रस्तावित संशोधन में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट, रोजाना सुनवाई और चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा दोषियों पर 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है।

1. पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव

प्रस्तावित संशोधन विधेयक के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का प्रस्ताव है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को किसी भी सेशन कोर्ट को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में अधिसूचित करने का अधिकार दिया जाएगा। इन अदालतों में मामलों की रोजाना सुनवाई होगी।

3 महीने में पूरा करना होगा ट्रायल

विधेयक के मुताबिक, चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर मुकदमे का ट्रायल पूरा करना होगा। सरकार का उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा में धांधली से जुड़े मामलों में लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया को तेज करना है।

2. जांच के लिए 2 महीने की समयसीमा

संशोधन विधेयक में पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की जांच 2 महीने के भीतर पूरी करने का प्रस्ताव है।

इस प्रावधान के जरिए जांच प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने की कोशिश की गई है। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार किसी भी मामले की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स भी गठित कर सकेगी।

3. सामान्य मामलों में 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये जुर्माना

प्रस्तावित कानून में पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों में सजा को और सख्त करने का प्रावधान है।

दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों को कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है। इसके साथ ही 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाए जाने का प्रस्ताव है।

संगठित गिरोहों पर और कड़ी कार्रवाई

अगर पेपर लीक या परीक्षा में धांधली संगठित तरीके से करने वाले गिरोह से जुड़ा मामला है, तो सजा और कड़ी होगी। ऐसे मामलों में न्यूनतम 7 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है।

4. पुराने कानून से कितना अलग होगा नया संशोधन?

फिलहाल लागू सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में सामान्य मामलों में 3 से 5 साल की जेल का प्रावधान है।

वहीं, संगठित अपराध के मामलों में 5 से 10 साल तक की सजा और कम से कम 1 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।

प्रस्तावित संशोधन इन प्रावधानों को और सख्त बनाने की दिशा में है। खासतौर पर संगठित तरीके से पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोहों पर आर्थिक दंड को काफी बढ़ाने का प्रस्ताव है।

5. परीक्षा प्रक्रिया के लिए नई गाइडलाइंस का प्रस्ताव

संशोधन विधेयक में परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए नई गाइडलाइंस तय करने का भी प्रस्ताव है।

इन गाइडलाइंस में परीक्षा केंद्रों का प्री-ऑडिट, उम्मीदवारों की बायोमेट्रिक जांच, सुरक्षा व्यवस्था, सीट आवंटन, प्रश्नपत्र तैयार करने और अपलोड करने की प्रक्रिया, परीक्षा के दौरान निगरानी और परीक्षा के बाद की गतिविधियों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

इसके अलावा दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए स्क्राइब उपलब्ध कराने की व्यवस्था को भी परीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है।

15 तरह की गतिविधियां अपराध की श्रेणी में

प्रस्तावित विधेयक में 15 प्रकार की गतिविधियों को स्पष्ट रूप से अपराध की श्रेणी में रखने का प्रावधान है।

इनमें प्रश्नपत्र लीक करना, OMR शीट से छेड़छाड़, फर्जी वेबसाइट बनाना, फर्जी एडमिट कार्ड जारी करना और परीक्षा प्रक्रिया में अन्य प्रकार की धोखाधड़ी शामिल है।

24 जुलाई को कैबिनेट ने दी थी मंजूरी

प्रस्तावित सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 जुलाई को मंजूरी दी थी। इसे 27 जुलाई को लोकसभा में पेश करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

विधेयक को पेश करने, उस पर चर्चा करने और पारित कराने की प्रक्रिया एक ही दिन में पूरी होना सामान्य तौर पर कम देखने को मिलता है। सरकार का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य परीक्षाओं की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को मजबूत करना है।

धांधली पर कड़ा शिकंजा

पेपर लीक पर प्रस्तावित संशोधन विधेयक में जांच से लेकर ट्रायल तक समयसीमा तय करने और दोषियों के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान है। 2 महीने में जांच पूरी करने, चार्जशीट के 3 महीने के भीतर ट्रायल खत्म करने, सामान्य मामलों में 10 साल तक की जेल और संगठित गिरोहों पर 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने जैसे प्रावधानों के जरिए सरकार परीक्षा में धांधली पर कड़ा शिकंजा कसना चाहती है। (Amar Bharti)

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