बुलडोजर कार्रवाई से 300 से अधिक मकान ध्वस्त, 1000 से ज्यादा लोग प्रभावित

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित यमुना बाजार घाट क्षेत्र में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बड़े पैमाने पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी। छह से अधिक बुलडोजर लगातार अवैध निर्माणों को हटाने में जुटे रहे, जबकि पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में लेकर प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए व्यापक इंतजाम किए।
इस कार्रवाई के दौरान कई परिवारों ने वर्षों पुराने अपने आशियाने को टूटते हुए देखा। लोगों के चेहरों पर मायूसी, आक्रोश और भविष्य की चिंता साफ दिखाई दी।
300 से अधिक मकान ध्वस्त, 1000 से ज्यादा लोग प्रभावित
स्थानीय लोगों के अनुसार, घाट नंबर 2 से 32 के बीच बने 30 घाटों पर स्थित 300 से अधिक मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। इस बुलडोजर कार्रवाई से 1000 से अधिक लोग बेघर हो गए हैं।
प्रभावित परिवारों का कहना है कि अचानक सिर से छत छिन जाने के कारण उनके सामने रहने, बच्चों की पढ़ाई और रोज़गार जैसी गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
नोटिस मिलने के बाद भी नहीं मिली राहत
डीडीए और डीडीएमए (DDMA) ने पिछले महीने प्रभावित लोगों को नोटिस जारी कर क्षेत्र खाली करने के निर्देश दिए थे। प्रशासन ने पहले 1 मई को डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट (DM Act) के तहत नोटिस जारी किया और इसके बाद 15 मई को डीडीए ने 15 दिनों के भीतर मकान खाली करने का निर्देश दिया।
मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक भी पहुंचा, लेकिन अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद प्रशासन ने निर्धारित योजना के तहत बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी।
बाढ़ क्षेत्र बताकर हटाए गए निर्माण
डीडीए का कहना है कि यमुना बाजार का यह इलाका यमुना नदी के संरक्षित बाढ़ क्षेत्र (Floodplain) और O-Zone में आता है। नियमों के अनुसार इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण अवैध माना जाता है।
प्राधिकरण का दावा है कि पर्यावरण संरक्षण, बाढ़ सुरक्षा और नदी क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से यह बुलडोजर कार्रवाई की गई है।
कई परिवार पहले ही छोड़ चुके थे घर
नोटिस मिलने के बाद कई परिवारों ने एक सप्ताह पहले से ही अपना सामान समेटना शुरू कर दिया था। कुछ लोग दिल्ली के बुराड़ी, वजीराबाद, शास्त्री पार्क और उस्मानपुर जैसे इलाकों में किराये के मकान तलाशने लगे थे।
हालांकि, बड़ी संख्या में ऐसे परिवार भी रहे जो अंतिम समय तक अपने घरों में डटे रहे और बुलडोजर के सामने अपने आशियाने को टूटते हुए देखते रहे।
रोज़गार और जीवन पर पड़ा गहरा असर
इस कार्रवाई का असर केवल आवास तक सीमित नहीं रहा। प्रभावित लोगों में पंडे, नाविक, गोताखोर, नाई, छोटे दुकानदार और किरायेदार भी शामिल हैं।
इन लोगों का कहना है कि अब उनके सामने सिर्फ रहने की नहीं बल्कि रोजगार बचाने की भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। कई परिवारों की आय पूरी तरह इस क्षेत्र पर निर्भर थी। प्रशासन के द्वारा की जा रही इस बुलडोजर कार्रवाई से स्थानीय लोगों में भारी मायूसी और नाराजगी बनी हुई है।
महंगे किराए ने बढ़ाई परेशानी
स्थानीय लोगों के मुताबिक, आसपास के इलाकों में किराया उनकी आर्थिक क्षमता से कहीं अधिक है। जहां पहले तीन कमरों का मकान इसी इलाके में आसानी से उपलब्ध था, वहीं अब दूसरे क्षेत्रों में इसी तरह का मकान लेने के लिए 12 से 15 हजार रुपये प्रति माह तक किराया देना पड़ रहा है।
बुलडोजर कार्रवाई से प्रभावित परिवारों का कहना है कि इतनी महंगाई में नए घर और रोजगार दोनों की व्यवस्था करना बेहद मुश्किल हो गया है।
प्रभावित लोगों ने सुनाई अपनी आपबीती
20 वर्षों से यमुना बाजार में रहने वाले बिजली मैकेनिक नागेंद्र मिश्रा ने बताया कि परिवार के साथ आश्रय गृह में रहना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी बेटियां वहां सुरक्षित महसूस नहीं करतीं और नए इलाके में मकान का किराया भी बहुत अधिक है।
वहीं बीए तृतीय वर्ष की छात्रा मुस्कान ने बताया कि माता-पिता के निधन के बाद वह अपने मामा के घर रह रही थी। डीडीए की इस बुलडोजर कार्रवाई से मकान टूट चुके हैं। अब मकान टूट जाने से उसकी पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। उसने कहा कि वह नौकरी करके अपनी पढ़ाई जारी रखने की कोशिश करेगी।
बुलडोजर कार्रवाई पर प्रशासन का पक्ष
डीडीए का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, घाट नंबर 2 से 32 तक का पूरा क्षेत्र यमुना के संरक्षित बाढ़ क्षेत्र में आता है और यहां किए गए निर्माण अवैध थे। पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन अतिक्रमणों को हटाना आवश्यक था।
कार्रवाई के प्रमुख आंकड़े
- ध्वस्त मकान: 300 से अधिक
- प्रभावित लोग: 1000 से अधिक
- बुलडोजर: 6 से अधिक
- क्षेत्र: कश्मीरी गेट, यमुना बाजार घाट
- नोटिस अवधि: 15 से 30 दिन पहले जारी
- कार्रवाई का कारण: संरक्षित बाढ़ क्षेत्र से अतिक्रमण हटाना
क्या है आगे की चुनौती?
दिल्ली DDA बुलडोजर कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, रोजगार और बच्चों की शिक्षा को लेकर है। वहीं प्रशासन का कहना है कि यमुना के बाढ़ क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त रखना पर्यावरण और जनहित दोनों के लिए जरूरी है। ऐसे में यह कार्रवाई आने वाले दिनों में भी चर्चा का विषय बनी रह सकती है। (Amar Bharti)
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