दालमंडी की ऐतिहासिक और अत्यंत व्यस्त गली को मॉडल सड़क के रूप में विकसित करने की योजना है

वाराणसी। दालमंडी सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत सोमवार तड़के एक बार फिर प्रशासन का बुलडोजर गरजा। सुबह करीब सात बजे वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) ने पोकलैंड मशीन और बुलडोजर की मदद से पांच अवैध घोषित मकानों को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और किसी प्रकार का विरोध देखने को नहीं मिला।
ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे और पूरे ऑपरेशन की निगरानी करते रहे। प्रशासन के मुताबिक जिन भवनों को गिराया गया था, उन्हें पहले ही वीडीए द्वारा अवैध घोषित कर नोटिस जारी किया जा चुका था। मुनादी कराकर भवन खाली करने के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी कब्जा नहीं हटाया गया, जिसके बाद कार्रवाई की गई।
एसीपी अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि दालमंडी क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है और शेष भवनों पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब तक 150 भवनों पर कार्रवाई
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा दालमंडी सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए कुल 181 भवनों और दुकानों को चिह्नित किया गया था। सोमवार की कार्रवाई के बाद अब तक 150 भवनों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी की जा चुकी है, जिनमें करीब 70 भवन पूरी तरह जमींदोज किए जा चुके हैं।
प्रशासन की ओर से प्रभावित भवन स्वामियों को अब तक 65 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा वितरित किया जा चुका है। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता के.के. सिंह ने बताया कि जून के अंतिम सप्ताह तक सभी चिह्नित भवनों को हटाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि सड़क चौड़ीकरण का कार्य समयबद्ध तरीके से शुरू कराया जा सके।
इन भवनों पर चली पोकलैंड मशीन
सोमवार को मकान संख्या सीके-42/94, सीके-42/95, सीके-43/145, सीके-43/175-बी, सीके-50/204 और सीके-43/123 पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। प्रशासन का कहना है कि सभी भवनों के स्वामियों को पूर्व में नोटिस देकर कार्रवाई की सूचना दे दी गई थी।
परियोजना का महत्व
दालमंडी की ऐतिहासिक और अत्यंत व्यस्त गली को मॉडल सड़क के रूप में विकसित करने की योजना है। यह परियोजना काशी के यातायात प्रबंधन और पर्यटन विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काशी दौरे के दौरान इस परियोजना का शिलान्यास किया गया था। परियोजना के लिए राज्य सरकार ने 215.88 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं, जबकि प्रभावित 181 भवन एवं दुकान स्वामियों को लगभग 191 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में दिए जाने का प्रावधान है।
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