भारत के लिए बड़ी राहत! होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से सस्ता हो सकता है तेल

अमेरिका-ईरान समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य होने की संभावना बढ़ी। इससे भारत को ऊर्जा और महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से तेल कीमतों में गिरावट और भारत को राहत
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद।

नई दिल्ली/अमर भारती। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा संभावित समझौते की खबरों के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत के संकेत दिखाई देने लगे हैं। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच एक समझौते पर सहमति बनी है, जिस पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर हो सकते हैं। इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से पूरी तरह खोलने और समुद्री व्यापार को सामान्य करने का प्रावधान शामिल है। यदि ऐसा होता है तो इसका सबसे बड़ा लाभ भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों को मिल सकता है।

होर्मुज खुलने से भारत को मिलेगी राहत

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए दुनिया में खपत होने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत परिवहन होता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे खाड़ी देशों से तेल और गैस का निर्यात मुख्य रूप से इसी रास्ते से होता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से आयात करता है, इसलिए इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

तेल आपूर्ति सामान्य होने की बढ़ी उम्मीद

फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के कारण इस जलमार्ग से तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इसके चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। फरवरी में जहां ब्रेंट क्रूड की कीमत 70 से 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी, वहीं संघर्ष बढ़ने के बाद यह 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। इससे दुनिया भर में ऊर्जा लागत बढ़ी और आयातक देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ा।

युद्धविराम से ऊर्जा बाजार में स्थिरता संभव

हालांकि, युद्धविराम और समझौते की खबर सामने आने के बाद बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम पर सहमति बन गई है तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य होगी। इस घोषणा के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह लगभग 84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

भारत के आयात खर्च में आ सकती कमी

तेल की कीमतों में आई इस नरमी का असर भारत पर भी पड़ सकता है। कच्चे तेल की लागत कम होने से पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों के उत्पादन खर्च में कमी आएगी। साथ ही समुद्री माल ढुलाई की लागत घटने से आयात-निर्यात कारोबार को भी राहत मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे महंगाई पर दबाव कम होगा और अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलेगी।

महंगाई पर दबाव घटने की उम्मीद बढ़ी

तेल कीमतों में पहले आई तेजी के दौरान सरकार ने कुछ समय तक खुदरा ईंधन कीमतों में बदलाव नहीं किया था। बाद में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती की गई ताकि उपभोक्ताओं पर बोझ कम किया जा सके। इसके बावजूद चुनावों के बाद पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली। सरकारी तेल कंपनियां भी लंबे समय से लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचने के कारण नुकसान झेल रही हैं।

वैश्विक व्यापार को मिलेगा नया सहारा

अब यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल जाता है और वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लौटती है, तो भारत को ऊर्जा सुरक्षा, कम आयात लागत और महंगाई नियंत्रण के रूप में महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में तेल की कीमतों में और नरमी आने पर उपभोक्ताओं तथा तेल कंपनियों दोनों को राहत मिलने की संभावना है।

यह भी पढ़ें

ED की शिकायत पर बड़ा एक्शन, अमेरिकी मिशनरी संगठन TTI समेत छह लोगों पर UAPA के तहत केस दर्ज

TMC के 20 बागी सांसदों से बदली NCPI की किस्मत, जानिए क्या है इस पार्टी की पूरी कहानी?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *