विश्वविद्यालयों में जून की परीक्षाएं कराने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल: संवेदनशील निर्णय लेने की मांग

बढ़ते तापमान के बीच छात्रों और शिक्षकों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता जताई, कई महाविद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की भी कमी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जून माह में सेमेस्टर परीक्षाएं आयोजित किए जाने को लेकर विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में तापमान कई जिलों में 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे छात्रों और शिक्षकों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी शिक्षक प्रकोष्ठ ने सरकार से परीक्षाओं को लेकर पुनर्विचार करने की मांग की है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी शिक्षक प्रकोष्ठ के चेयरमैन डॉ अमित कुमार राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि फाइनल सेमेस्टर को छोड़कर अन्य सभी परीक्षाएं जून माह में आयोजित न कराई जाएं। उन्होंने कहा कि अत्यधिक गर्मी के कारण छात्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही कई शिक्षकों और कर्मचारियों की तबीयत भी प्रभावित हो रही है। ऐसे हालात में परीक्षाएं आयोजित करना छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ होगा।

डॉ. अमित कुमार राय ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही 15 मई तक परीक्षाएं संपन्न कराने के निर्देश दे चुके थे, लेकिन इसके बावजूद कई विश्वविद्यालयों में परीक्षाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं। अब जून की भीषण गर्मी में परीक्षाएं कराने का निर्णय छात्रों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई महाविद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है। अनेक परीक्षा केंद्रों पर पंखे सही ढंग से काम नहीं कर रहे हैं और पेयजल जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं भी पर्याप्त नहीं हैं। ऐसी स्थिति में लंबे समय तक परीक्षा कक्षों में बैठना छात्रों और शिक्षकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

कांग्रेस शिक्षक प्रकोष्ठ ने सरकार से मांग की है कि छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संवेदनशील निर्णय लिया जाए। उनका कहना है कि यदि आवश्यक हो तो परीक्षाओं को स्थगित कर मौसम सामान्य होने पर आयोजित किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या से बचा जा सके। इस मुद्दे को लेकर छात्र संगठनों और शिक्षकों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है।

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