NEET Protest: धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा लोकतंत्र की जीत है, जो लाइन से हटे उन्हें लाइन में रखना जरूरी है – अभिजीत दीपके

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली: शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे साथ ही सीजेपी ने खुशी जाहिर की है. पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने कहा कि झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए. दिपके ने संविधान की किताब दिखाते हुए NEET पेपर लीक के बाद खुदकुशी करने वाले छात्र-छात्राओं की मौत पर शोक व्यक्त किया और सरकार ने मांग की कि इन सभी के परिवारों को एक-एक करोड़ रूपए मुआवजे के तौर पर दिए जाएं. हालांकि ये सारी बातें जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक में रखी गई थीं.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में कि उन्होंने छात्रों की भावनाओं और देश के युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए यह फैसला लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि छात्रों के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय है। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि वे नहीं चाहते कि इस पूरे मुद्दे का फायदा कोई राष्ट्रविरोधी ताकत उठाए।
उधर, जंतर-मंतर पर चल रहे CJP आंदोलन में इस फैसले के बाद जश्न का माहौल देखने को मिला। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा, “झुकने वाला चाहिए, झुकती है दुनिया।” उन्होंने इसे लोकतंत्र और छात्रों की एकजुटता की जीत बताया। दिपके ने कहा कि अगर छात्र डरते नहीं हैं और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते हैं, तो बदलाव संभव है। शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अभिजीत दिपके काफी जोश में नज़र आए और इस सफलता का श्रेय छात्र एकता और युवा शक्ति को दिया।

हालांकि, आंदोलन यहीं खत्म नहीं हुआ। अभिजीत दिपके ने साफ किया कि केवल धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा काफी नहीं है, उनकी अन्य मांगें अभी भी बरकरार हैं। उन्होंने कथित रूप से परीक्षा विवाद से जुड़े मृत छात्रों के परिवारों के लिए मुआवज़े की मांग दोहराई, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के लिए जवाबदेही और सार्वजनिक माफी की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि जब तक बाकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस आंदोलन का अंतिम पड़ाव साबित होगा, या फिर छात्रों की बाकी मांगों को लेकर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच नई बातचीत का दौर शुरू होगा?
फिलहाल, पूरे देश की नजरें सरकार और आंदोलन के अगले कदम पर टिकी हैं। (Amar Bharti)
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