धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा लोकतंत्र की जीत है, जो लाइन से हटे उन्हें लाइन में रखना जरूरी है – अभिजीत दीपके

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर चल रहे CJP आंदोलन में जश्न का माहौल देखने को मिला। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इसे छात्रों की एकजुटता और लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत बताया। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आंदोलन की सभी मांगों का अंत नहीं है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा CJP का जश्न, अभिजीत दिपके बोले- ‘झुकती है दुनिया’
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद से इस्तीफा देने के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, “झुकने वाला चाहिए, झुकती है दुनिया।” दिपके ने इस फैसले को छात्रों की एकजुटता और युवा शक्ति की जीत बताया।
जंतर-मंतर पर मौजूद आंदोलनकारियों के बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उत्साह देखने को मिला। अभिजीत दिपके ने कहा कि अगर छात्र डरने के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते हैं, तो बदलाव संभव है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय छात्रों की एकता और युवाओं की ताकत को दिया।
26 दिन के आंदोलन के बाद मिली बड़ी सफलता, लेकिन संघर्ष अभी बाकी
CJP आंदोलन के दौरान छात्रों की ओर से परीक्षा व्यवस्था, जवाबदेही और कथित पेपर लीक से जुड़े मामलों को लेकर लगातार सवाल उठाए गए। आंदोलनकारियों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी थीं।
अभिजीत दिपके ने संविधान की किताब दिखाते हुए NEET पेपर लीक के बाद खुदकुशी करने वाले छात्र-छात्राओं की मौत पर शोक जताया। उन्होंने इन छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग दोहराई। दिपके ने कहा कि यह मांग केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक में भी रखी गई थी।

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे में छात्रों और युवाओं का किया जिक्र
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में कहा कि उन्होंने छात्रों की भावनाओं और देश के युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए यह फैसला लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि छात्रों के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय है।
अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी लिखा कि वह नहीं चाहते कि इस पूरे मुद्दे का फायदा कोई राष्ट्रविरोधी ताकत उठाए। इस्तीफे के बाद अब शिक्षा मंत्रालय से जुड़े मुद्दों और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार के अगले कदम पर नजर बनी हुई है।
अभिजीत दिपके ने कहा- केवल इस्तीफा काफी नहीं, बाकी मांगें भी बरकरार
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलनकारियों ने खुशी जरूर जताई, लेकिन CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने साफ किया कि आंदोलन की बाकी मांगें अभी भी कायम हैं।
उन्होंने कथित रूप से परीक्षा विवाद से जुड़े मृत छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग दोहराई। इसके अलावा दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर जवाबदेही तय करने और सार्वजनिक माफी की मांग भी रखी गई।
अभिजीत दिपके के मुताबिक, जब तक बाकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन का मुद्दा पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता।
छात्रों की एकता और युवा शक्ति को दिया जीत का श्रेय
अभिजीत दिपके ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों के शांतिपूर्ण संघर्ष का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि छात्रों के डरने के बजाय अपनी आवाज उठाने से बदलाव का रास्ता खुलता है।

CJP के आंदोलन में छात्रों की भागीदारी और लगातार उठाई गई मांगों के बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलनकारियों ने इसे एक महत्वपूर्ण सफलता के तौर पर देखा।
अब आगे क्या? सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत पर नजर
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा CJP आंदोलन के लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि के तौर पर सामने आया है। लेकिन आंदोलनकारियों की अन्य मांगें अभी भी चर्चा के केंद्र में हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आंदोलन का अंतिम पड़ाव साबित होगा या फिर छात्रों की बाकी मांगों को लेकर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत का नया दौर शुरू होगा।
अगले कदम पर नज़र
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP आंदोलन में जश्न का माहौल है और अभिजीत दिपके ने इसे छात्रों की एकजुटता की जीत बताया है। हालांकि, मुआवजा, पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही और सार्वजनिक माफी जैसी मांगों को लेकर आंदोलनकारियों का रुख अभी भी स्पष्ट है। ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सरकार और आंदोलनकारियों के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं। (Amar Bharti)
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